बॉलीवुड अभिनेत्री अंजना सुखानी ने हाल ही में फिल्म इंडस्ट्री में इंटिमेट सीन्स को लेकर खुलकर अपनी राय रखी है। ‘सलाम-ए-इश्क’, ‘गोलमाल रिटर्न्स’ और ‘गुड न्यूज’ जैसी फिल्मों में काम कर चुकीं अंजना का कहना है कि करियर की शुरुआत में उन्होंने तय किया था कि वह इंटिमेट सीन्स नहीं करेंगी, लेकिन समय के साथ उनकी सोच में बदलाव आया और उन्होंने इस विषय को एक अलग नजरिए से समझा।
अंजना ने बताया कि इंडस्ट्री में काम करते हुए उन्होंने सीखा कि किसी भी चीज को पूरी तरह नकारने से पहले उसकी जरूरत और संदर्भ को समझना जरूरी होता है। उनके मुताबिक, जिन निर्देशकों के साथ उन्होंने काम किया, उन्होंने कभी भी कहानी से इतर या जबरन ऐसे दृश्यों को शामिल नहीं किया। अभिनेत्री का मानना है कि यदि किसी कलाकार को स्क्रिप्ट और निर्देशक पर भरोसा हो, तो ऐसे दृश्यों को लेकर अनावश्यक डर नहीं होना चाहिए।
हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हर कलाकार की परिस्थितियां अलग होती हैं। खासकर वे कलाकार जो फिल्मी परिवारों से नहीं आते, कई बार उनके लिए किसी सीन को मना करना आसान नहीं होता। अंजना के अनुसार, कई बार कलाकारों के सामने स्थिति ऐसी होती है कि यदि वे किसी दृश्य के लिए इंकार करें, तो उन्हें पूरी फिल्म छोड़नी पड़ सकती है। ऐसे में करियर और अवसरों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

अभिनेत्री ने कहा कि कलाकारों को अपनी सीमाओं और सहजता की स्पष्ट समझ होनी चाहिए। अगर शूटिंग के दौरान किसी सीन को लेकर असहज महसूस हो, तो सवाल पूछने और अपनी बात रखने का पूरा अधिकार होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कलाकारों को यह जानने का हक है कि कैमरा किस एंगल से शूट कर रहा है और अंतिम दृश्य में क्या दिखाया जाएगा। विशेष रूप से स्थापित कलाकारों के पास अपनी शर्तें रखने और स्पष्टता मांगने की अधिक स्वतंत्रता होती है।
फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ के जरिए लंबे समय बाद बड़े पर्दे पर वापसी करने वाली अंजना ने अपने करियर और इंडस्ट्री में आए बदलावों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के बाद दर्शकों का रुझान ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की ओर बढ़ गया, जिससे थिएटर आधारित फिल्मों को प्रभावित होना पड़ा। आज भी दर्शक मुख्य रूप से बड़ी और भव्य फिल्मों के लिए सिनेमाघरों का रुख करते हैं। ऐसे माहौल में कलाकारों के लिए सही प्रोजेक्ट और अच्छे निर्देशकों के साथ काम करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
अपने करियर के सफर को याद करते हुए अंजना ने कहा कि उन्होंने हमेशा अलग-अलग निर्देशकों और कलाकारों से सीखने की कोशिश की है। रोहित शेट्टी, निखिल आडवाणी, संजय लीला भंसाली, प्रियदर्शन, राम गोपाल वर्मा और इम्तियाज अली जैसे फिल्मकारों के साथ काम करना उनके लिए सीखने का बड़ा अवसर रहा है।

वहीं दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करने के अनुभव को याद करते हुए अंजना ने कहा कि उनके सामने खड़े होते ही घबराहट महसूस होती थी। हालांकि कैमरा ऑन होते ही पूरा ध्यान सिर्फ अभिनय पर रहता था। उन्होंने नसीरुद्दीन शाह के साथ काम करने को एक “मास्टर क्लास” बताया और कहा कि ऐसे कलाकारों के साथ काम करने से अभिनय की समझ और गहरी हो जाती है।
अंजना सुखानी का यह बयान एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों की चुनौतियों, पेशेवर सीमाओं और बदलते नजरियों पर नई चर्चा छेड़ सकता है।