एक्ट्रेस Aradhna Sharma ने बिहार के जमुई में सामने आए मामले के बाद महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जाहिर की है। जमुई में कोचिंग से लौट रही कक्षा 10 की दो छात्राओं के साथ कथित तौर पर मारपीट और बदसलूकी का मामला सामने आया था। घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इसे लेकर काफी नाराजगी देखने को मिली।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 19 सितंबर को जमुई में हुई। आरोप है कि कोचिंग से लौट रही दोनों नाबालिग छात्राओं को कुछ लोगों के एक समूह ने रोका और उनके साथ मारपीट व बदसलूकी की। मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर जांच के लिए Special Investigation Team (SIT) का गठन किया और तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया।
National Commission for Women (NCW) ने भी मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी और समयबद्ध जांच की मांग की। अधिकारियों ने नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाली सामग्री सोशल मीडिया पर शेयर नहीं करने की भी अपील की है।
Aradhna Sharma ने योजनाओं के अमल पर उठाया सवाल
इस घटना के बीच Aradhna Sharma ने Instagram पर 11 स्लाइड का एक पोस्ट शेयर किया। इसमें उन्होंने महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं और अभियानों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि क्या इनका असर जमीन पर महिलाओं की सुरक्षा के रूप में भी दिखाई दे रहा है।
उन्होंने ‘Beti Bachao Beti Padhao’, ‘Mission Shakti’ और ‘Nari Shakti’ जैसी पहलों का जिक्र करते हुए लिखा, “Beti bachane ke posters nahi… beti ko bachane wala system chahiye.”
अपने पोस्ट में Aradhna ने इन योजनाओं की जरूरत को नकारने के बजाय उनके उद्देश्य और जमीनी स्तर पर उनके अमल के बीच के अंतर पर बात की। उन्होंने बताया कि ‘Beti Bachao Beti Padhao’ का उद्देश्य बच्चियों के संरक्षण, शिक्षा और विकास को बढ़ावा देना है।
वहीं ‘Mission Shakti’ महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण से जुड़ा केंद्र सरकार का व्यापक कार्यक्रम है। इसके तहत ‘Sambal’ और ‘Samarthya’ दो प्रमुख हिस्से हैं। One Stop Centres, Women Helplines, Beti Bachao Beti Padhao और Nari Adalats जैसे घटक भी इससे जुड़े हैं।
‘Implementation is what creates change on the ground’
Aradhna ने अपने पोस्ट में योजनाओं और कानूनों की मौजूदगी के साथ-साथ उनके सही तरीके से लागू होने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने लिखा कि पोस्टर बदले जा सकते हैं और कानून कागज पर मौजूद हो सकते हैं, लेकिन “implementation is what creates change on the ground.”
उन्होंने National Crime Records Bureau (NCRB) के आंकड़ों का भी जिक्र किया। पोस्ट में 2023 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,48,211 मामले दर्ज होने की बात कही गई है, जबकि 2022 में यह आंकड़ा 4,45,256 था। वहीं 2023 में रेप के 29,670 मामले दर्ज किए गए थे।
Aradhna ने इन आंकड़ों के जरिए यह सवाल उठाया कि नीतियां, कानून और सहायता से जुड़े सिस्टम महिलाओं और बच्चियों को वास्तविक जिंदगी में कितनी सुरक्षा दे पा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि आखिर बेटियों को सुरक्षित माहौल के लिए और कितना इंतजार करना होगा।
एक्ट्रेस ने परिवारों और आम लोगों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी डालने की सोच पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि अगर किसी व्यक्ति से अपने परिवार के सदस्यों को सुरक्षित रखने, मुश्किल वक्त में उनके साथ खड़े रहने और जरूरत पड़ने पर मदद करने की उम्मीद की जाती है, तो राज्य और व्यवस्था से भी ऐसी ही सुरक्षा की उम्मीद क्यों नहीं की जानी चाहिए।
अपने पोस्ट के आखिर में Aradhna ने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं को सिर्फ मजबूत बनने का संदेश देने के बजाय ऐसा सिस्टम तैयार करने की जरूरत है, जहां उन्हें और बच्चियों को शुरुआत से ही सुरक्षित महसूस हो।