Bigg Boss 20 के लेटेस्ट एपिसोड में आम्रपाली दुबे भले ही कप्तानी हासिल नहीं कर पाईं, लेकिन एक बार फिर उन्होंने साबित कर दिया कि किसी टाइटल के बिना भी घर में अपनी मजबूत पहचान बनाई जा सकती है। दोस्तों को कप्तानी के लिए आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने से लेकर युंग डीएसए के समर्थन में खड़े होने और रिति तिवारी को सही सलाह देने तक, आम्रपाली का आत्मविश्वास, समझदारी और जिम्मेदारी निभाने का अंदाज देखने को मिला।
कप्तानी की प्रक्रिया के दौरान आम्रपाली का सपोर्टिव अंदाज सामने आया। कंटेस्टेंट्स को चुनते समय उन्होंने अपनी दोस्त रिति तिवारी, लव गिल और मैरी कॉम को कप्तानी की दावेदारी पेश करने के लिए प्रोत्साहित किया। खुद पर ध्यान देने के बजाय आम्रपाली ने अपने करीबियों को आगे बढ़ने का मौका देने की कोशिश की। उनके इस रवैये से साफ नजर आया कि घर में उनके रिश्ते सिर्फ निजी फायदे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह अपने दोस्तों को भी आगे बढ़ते देखना चाहती हैं।
कप्तानी का टास्क जैसे-जैसे आगे बढ़ा, आम्रपाली के नेतृत्व करने की खूबियां भी सामने आने लगीं। काजी तौकीर और युंग डीएसए के बीच हुई भिड़ंत के दौरान आम्रपाली युंग के समर्थन में खड़ी नजर आईं और उन्होंने अपना पक्ष भी स्पष्ट रखा। टास्क के दौरान माहौल काफी गरमा गया और काजी-युंग की भिड़ंत एपिसोड के प्रमुख पलों में से एक बन गई।
इस दौरान आम्रपाली का दोस्ती के साथ ईमानदारी बनाए रखने का अंदाज भी देखने को मिला। इससे पहले हुई डिस बैटल के बाद उन्होंने रिति से साफ कहा था कि वह स्थिति को संभालने के उनके तरीके से सहमत नहीं थीं। हालांकि, कप्तानी का टास्क शुरू होने पर भी आम्रपाली ने अपनी दोस्त का साथ देना जारी रखा। इससे पता चलता है कि उनके लिए किसी के साथ खड़े होने का मतलब उसकी हर बात से सहमत होना नहीं है।
आम्रपाली को रिति की बातें ध्यान से सुनते और उन्हें दूसरे घरवालों के साथ बेहतर व्यवहार करने की सलाह देते हुए भी देखा गया। उन्होंने स्थिति को और बढ़ाने के बजाय अपनी दोस्त को समझाने की कोशिश की कि रिश्तों और मतभेदों को ज्यादा समझदारी से संभालना जरूरी है।
घर के अंदर आम्रपाली की यही संतुलित सोच उनकी एक खास पहचान बनती जा रही है। जब उन्हें कुछ गलत लगता है, तो वह खुलकर अपनी बात रखती हैं। अपने करीबियों के लिए मजबूती से खड़ी होती हैं और जब माहौल तनावपूर्ण होता है, तब भी बातचीत और समझदारी से स्थिति को संभालने की कोशिश करती हैं।
हालांकि, इस बार भी कप्तानी की बाजी गुल्लू के हाथ लगी और उन्होंने लगातार दूसरी बार कप्तानी हासिल की। लेकिन इस पूरे टास्क में आम्रपाली का सफर एक अलग तरह की जीत की कहानी बयां करता है। उन्होंने दिखाया कि नेतृत्व करने के लिए कप्तान का बैज पहनना जरूरी नहीं है। कभी दूसरों को प्रोत्साहित करना, कभी सही बात के लिए खड़े होना और कभी किसी को सही दिशा दिखाना भी एक लीडर की पहचान होती है।
आम्रपाली इस बार भले ही कप्तान नहीं बनीं, लेकिन इस एपिसोड ने एक बार फिर दिखा दिया कि वह घर में किसी रानी से कम नहीं हैं। उनके लिए कप्तानी का टाइटल भले ही कुछ समय के लिए हो, लेकिन एक लीडर बनने की खूबियां उनके खेल का पहले से ही हिस्सा हैं।