2026 की शुरुआत बॉलीवुड के लिए खास बन जाती है जब साल की पहली फिल्म ‘इक्कीस’ बड़े पर्दे पर दस्तक देती है। यह फिल्म न सिर्फ एक नई कहानी लेकर आती है, बल्कि अनुभव, भावना और मजबूत अभिनय के दम पर दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ती है। ‘इक्कीस’ उन फिल्मों में से है जो शोर-शराबे के बजाय अपनी कहानी और किरदारों के ज़रिए आगे बढ़ती है।
कहानी
‘इक्कीस’ की कहानी मानवीय भावनाओं, संघर्ष और फैसलों के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दर्शकों को धीरे-धीरे अपने साथ जोड़ती है। कहानी में थ्रिल है, इमोशन है और ऐसे मोड़ हैं जो दर्शक को सोचने पर मजबूर करते हैं। बिना ज़्यादा जटिल हुए, फिल्म अपनी बात साफ़ और प्रभावशाली तरीके से रखती है।
अभिनय
फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष इसका अभिनय है। खास तौर पर धर्मेंद्र की मौजूदगी फिल्म को एक अलग ही ऊँचाई पर ले जाती है। उनकी स्क्रीन प्रेजेंस आज भी उतनी ही प्रभावशाली है, और उनका किरदार कहानी को गहराई देता है। यह कहना गलत नहीं होगा कि ‘इक्कीस’ धर्मेंद्र के शानदार फिल्मी सफर को एक भावनात्मक श्रद्धांजलि भी है। उनके साथ युवा कलाकारों ने भी संतुलित और प्रभावशाली अभिनय किया है, जिससे पीढ़ियों के बीच की केमिस्ट्री साफ़ नज़र आती है।
निर्देशन और पटकथा
निर्देशन सधा हुआ और समझदारी भरा है। निर्देशक ने कहानी को न तो ज़रूरत से ज़्यादा खींचा है और न ही जल्दबाज़ी दिखाई है। पटकथा दर्शकों को बांधे रखती है और हर सीन का एक मकसद नज़र आता है। भावनात्मक दृश्यों को संवेदनशीलता के साथ पेश किया गया है, जो फिल्म को बनावटी होने से बचाता है।
संगीत और तकनीकी पक्ष
फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर कहानी के मूड को अच्छे से सपोर्ट करता है। गाने कम हैं लेकिन प्रभावी हैं और कहानी की गति को बाधित नहीं करते। सिनेमैटोग्राफी सादगी में खूबसूरत है और तकनीकी पक्ष फिल्म को एक साफ़-सुथरा अनुभव देता है।
‘इक्कीस’ एक ऐसी फिल्म है जो दर्शकों को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक अनुभव देती है। यह फिल्म साबित करती है कि मजबूत कहानी और सच्चा अभिनय आज भी दर्शकों को थिएटर तक खींच सकता है। धर्मेंद्र की दमदार मौजूदगी, संतुलित निर्देशन और भावनात्मक गहराई के कारण यह फिल्म साल की एक यादगार शुरुआत बनती है।
अगर आप ऐसी फिल्म देखना चाहते हैं जो दिल और दिमाग दोनों पर असर छोड़े, तो ‘इक्कीस’ आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है।