बॉलीवुड में अलग और चुनौतीपूर्ण फिल्मों का नाम आते ही एक फिल्म हमेशा याद आती है – ‘सोंचिरिया’। यह फिल्म 2019 में रिलीज़ हुई थी और इसे चंबल के क़स्बों की सच्चाई और खूबसूरत अभिनय के लिए काफी सराहा गया। लेकिन फिल्म के निर्देशक अभिषेक चौबे का मानना है कि अगर यह फिल्म आज बनती, तो शायद कोई भी इसे करने की हिम्मत नहीं करता।
‘सोंचिरिया’ – जोखिम भरी कहानी
‘सोंचिरिया’ एक ग्रिटी ड्रामा है, जिसमें अपराध, इंसानियत और रोमांच की कहानी को बेहद सजीव तरीके से दिखाया गया। फिल्म में सुशांत सिंह राजपूत ने मुख्य भूमिका निभाई थी, जिनकी साहसिक और संवेदनशील परफॉर्मेंस को दर्शकों और क्रिटिक्स ने खूब पसंद किया। अभिषेक चौबे कहते हैं कि आज के समय में कोई भी अभिनेता इस तरह का जोखिम नहीं उठाएगा।
आज के समय में पैसा नहीं मिलता
स्क्रीन के साथ एक इंटरव्यू में अभिषेक ने कहा,
“आज इसे बनाने के लिए कोई पैसा नहीं देगा। सेंसर से पहले ही, कोई आपको दस रुपये भी नहीं देगा। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर भी इसे फंड करना असंभव होगा।”
फिल्म के सह-लेखक सुदीप शर्मा भी मानते हैं कि अगर इसे फंड मिल भी जाए, तो शायद दर्शक इसे थिएटर्स में देखने नहीं आएंगे।
एक खत्म होती हुई फिल्मी दुनिया
अभिषेक चौबे का मानना है कि ‘सोंचिरिया’ उस दौर की आखिरी फिल्म थी। उन्होंने कहा,
“एक समय था जब अभिनेता जोखिम उठाने के लिए तैयार थे और दर्शकों में वैकल्पिक फिल्मों के लिए भूख थी। लगभग 15-20 साल तक इस तरह की फिल्में बनती रहीं और सफल भी होती रहीं। लेकिन अब वह दौर खत्म हो गया है।”
आज की फिल्म इंडस्ट्री में हर कदम पर फिल्में सिर्फ मुनाफ़े पर ही चलती हैं, और ऐसी सच्चाई पर आधारित, अलग तरह की फिल्में आसानी से जगह नहीं बना पातीं।
सुशांत सिंह राजपूत की याद
‘सोंचिरिया’ फिल्म हमेशा सुशांत सिंह राजपूत की याद दिलाती रहेगी। अभिषेक चौबे ने स्पष्ट किया कि आज कोई भी अभिनेता उनकी तरह साहसिक और अलग फिल्में करने का जोखिम नहीं उठाएगा।

अगर आप अलग और गहरी फिल्में पसंद करते हैं, तो ‘सोंचिरिया’ जैसी फिल्मों को मिस नहीं करना चाहिए। यह सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि अद्भुत कहानी, बेहतरीन अभिनय और सिनेमा के लिए प्यार का प्रतीक है।
बॉलीवुड की दुनिया में जोखिम और क्रिएटिविटी हमेशा एक चुनौती रही है। ‘सोंचिरिया’ इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि कैसे कुछ फिल्में सिर्फ हिम्मत और जुनून से बनती हैं।