बॉलीवुड अभिनेता अभय देओल हाल ही में अपनी हेल्थ जर्नी को लेकर चर्चा में आ गए हैं। आमतौर पर अपनी निजी ज़िंदगी को लाइमलाइट से दूर रखने वाले अभय ने इस बार सोशल मीडिया पर खुलकर अपनी लंबे समय से चली आ रही घुटने के दर्द और साइटिका की समस्या के बारे में बात की है। उन्होंने बताया कि कैसे स्टेम सेल थेरेपी ने उन्हें इस दर्द से राहत दिलाने में मदद की।
लंबे समय से दर्द से जूझ रहे थे अभय देओल
अभय देओल ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर करते हुए बताया कि उन्हें काफी समय से स्लिप डिस्क की वजह से बाएं पैर में साइटिका और घुटनों में तेज दर्द रहता था। कई बार हालात ऐसे हो गए थे कि उन्हें खुद को बेबस और निराश महसूस हुआ।
अभिनेता ने लिखा कि वह किसी भी तरह की सर्जरी नहीं करवाना चाहते थे, खासतौर पर पीठ से जुड़ी सर्जरी से वह हमेशा डरते रहे। इसी वजह से वह किसी वैकल्पिक और सुरक्षित इलाज की तलाश में थे।
साउथ कोरिया में मिला समाधान
इलाज की तलाश के दौरान अभय देओल को स्टेम सेल थेरेपी के बारे में पता चला। रिसर्च करने के बाद उन्हें यह तरीका सुरक्षित लगा और उन्होंने दक्षिण कोरिया के एक क्लिनिक में यह ट्रीटमेंट करवाने का फैसला किया।
अभय ने बताया कि उन्होंने यह थेरेपी Lydian Clinic में करवाई, जहां मशहूर डॉक्टर डॉ. अब्राहम एन ने उनका इलाज किया। अभय ने डॉक्टर को रीजेनेरेटिव मेडिसिन का एक्सपर्ट बताते हुए उनकी जमकर तारीफ की।

कैसा रहा स्टेम सेल थेरेपी का अनुभव
अपने अनुभव को शेयर करते हुए अभय देओल ने कहा कि यह प्रक्रिया उन्हें पूरी तरह नेचुरल और सेफ लगी। इस थेरेपी में मरीज के अपने ही स्टेम सेल्स का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे शरीर खुद को ठीक करने की प्रक्रिया शुरू करता है।
अभिनेता ने यह भी बताया कि वह हाल ही में दूसरे राउंड के इलाज के लिए दोबारा क्लिनिक गए थे और भविष्य की जरूरतों के लिए उनके स्टेम सेल्स को सुरक्षित रख लिया गया है। उन्होंने इस मेडिकल एडवांसमेंट को “कमाल का समय” बताया।
क्या है स्टेम सेल थेरेपी?
स्टेम सेल थेरेपी को रीजेनरेटिव मेडिसिन भी कहा जाता है। यह एक आधुनिक इलाज है, जिसमें स्टेम सेल्स की मदद से शरीर के खराब या क्षतिग्रस्त टिश्यू को रिपेयर किया जाता है। ये सेल्स नई कोशिकाओं में बदलने की क्षमता रखते हैं और शरीर की प्राकृतिक हीलिंग प्रक्रिया को मजबूत करते हैं।
स्टेम सेल थेरेपी के फायदे
- विशेषज्ञों के अनुसार, स्टेम सेल थेरेपी से
- पुराने दर्द में राहत मिल सकती है
- क्षतिग्रस्त टिश्यू की मरम्मत होती है
- इम्यून सिस्टम को सपोर्ट मिलता है
- मरीज की क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर हो सकती है
यही वजह है कि आजकल कई सेलेब्रिटीज़ और एथलीट्स इस इलाज की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
इलाज से जुड़े जोखिम भी जानना जरूरी
हालांकि यह थेरेपी फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन इसके कुछ जोखिम भी हैं। कभी-कभी ट्रांसप्लांट किए गए स्टेम सेल्स शरीर में सही तरह से काम नहीं कर पाते। कुछ मामलों में इम्यून सिस्टम उन्हें रिजेक्ट कर सकता है, जिससे अन्य दवाइयों की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए डॉक्टर की सलाह और पूरी जानकारी के बिना इस इलाज को अपनाना सही नहीं माना जाता।
अभय देओल का अनुभव यह दिखाता है कि मेडिकल साइंस कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है। हालांकि हर इलाज हर किसी के लिए एक-सा नहीं होता, लेकिन सही जानकारी और विशेषज्ञों की देखरेख में स्टेम सेल थेरेपी कई लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है।