यूट्यूबर अजय नागर उर्फ कैरीमिनाटी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई वायरल वीडियो नहीं, बल्कि कोर्ट का आदेश है। फिल्ममेकर करण जौहर की याचिका पर सुनवाई करते हुए मुंबई की एक अदालत ने कैरीमिनाटी को फटकार लगाई है और उनके द्वारा बनाए गए कथित मानहानिकारक कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया है।
यह मामला उस स्पूफ वीडियो से जुड़ा है, जिसमें कैरीमिनाटी ने करण जौहर के लोकप्रिय चैट शो ‘कॉफी विद करण’ की पैरोडी बनाई थी। इस वीडियो का शीर्षक ‘कॉफी विद जलन’ रखा गया था। करण जौहर ने इसे अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला और अपमानजनक बताते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
क्या है पूरा मामला?
कुछ समय पहले कैरीमिनाटी ने एक वीडियो जारी किया था, जिसमें उन्होंने करण जौहर के शो और उनकी शैली की पैरोडी की थी। वीडियो में कथित तौर पर करण जौहर का मजाक उड़ाया गया था। करण ने इसे अपनी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताते हुए मानहानि का मामला दर्ज कराया।
10 फरवरी को इस मामले की सुनवाई मुंबई की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहली नजर में माना कि वीडियो में आपत्तिजनक और मानहानिकारक भाषा का इस्तेमाल किया गया है।
कोर्ट का सख्त रुख
मामले की सुनवाई के बाद न्यायाधीश पी. जी. भोसले ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि अजय नागर और उनके सहयोगी दीपक चार ने करण जौहर के खिलाफ अपमानजनक और मानहानिकारक टिप्पणियां की हैं।
अदालत ने एक अस्थायी निषेध आदेश (इंटरिम इनजंक्शन) जारी करते हुए कैरीमिनाटी को इस तरह का कंटेंट बनाने और अपलोड करने से रोक दिया है। साथ ही कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया है कि संबंधित वीडियो और उससे जुड़े सभी कंटेंट को हटाया जाए।
किन-किन को बनाया गया प्रतिवादी?
इस मामले में केवल कैरीमिनाटी ही नहीं, बल्कि उनके मैनेजर दीपक चार, वन हैंड क्लैप मीडिया प्राइवेट लिमिटेड, गूगल और मेटा सहित अन्य पक्षों को भी प्रतिवादी के रूप में नामित किया गया है।
करण जौहर की ओर से दायर याचिका में मांग की गई थी कि इस तरह के वीडियो को पूरी तरह हटाया जाए और भविष्य में भी इस प्रकार की सामग्री प्रकाशित करने पर रोक लगाई जाए।
कैरीमिनाटी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि विवादित वीडियो पहले ही हटा लिया गया है और अब आगे किसी कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि वीडियो अन्य अकाउंट्स या प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है, तो उसे भी हटाया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर जारी बहस
इस मामले के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानहानि के अधिकार को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग इसे रचनात्मक अभिव्यक्ति पर रोक मान रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला कंटेंट स्वीकार्य नहीं है।
फिलहाल, अदालत के आदेश के बाद संबंधित वीडियो को हटाने की प्रक्रिया जारी है। यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कंटेंट क्रिएटर्स की जिम्मेदारी क्या होनी चाहिए और व्यंग्य तथा मानहानि के बीच की सीमा कहां तय होती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री और डिजिटल दुनिया के रिश्ते पर भी चर्चा छेड़ दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे इस मामले में क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं और क्या यह विवाद यहीं समाप्त होता है या आगे और कानूनी मोड़ लेता है।