ग्लोबल स्टार बन चुकी प्रियंका चोपड़ा ने हाल ही में Harvard India Conference में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए ऐसी बातें साझा कीं, जो उनके सफर की गहराई और जज़्बे को उजागर करती हैं। बॉलीवुड में सफल करियर के बाद हॉलीवुड में पहचान बनाना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा भी आया जब भारत में उनका काम डगमगाने लगा था। उसी दौर में उन्होंने अमेरिका में नई शुरुआत करने का फैसला किया एक ऐसा फैसला, जिसने उनके जीवन और करियर की दिशा बदल दी।
प्रियंका ने खुलासा किया कि हॉलीवुड में शुरुआती दिनों में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक छोटे से सीन की शूटिंग के लिए उन्हें लगभग 15 घंटे तक सेट पर इंतजार करना पड़ा, लेकिन अंत में उस दिन शूटिंग ही नहीं हो पाई। उन्होंने माना कि भारत में अपने करियर के दौरान उन्होंने ऐसा अनुभव कभी नहीं किया था। वहां उन्हें सम्मान और काम की निरंतरता मिली थी, लेकिन अमेरिका में उन्हें शून्य से शुरुआत करनी पड़ी। छोटे रोल, सीमित स्क्रीन टाइम और साझा ट्रेलर सब कुछ उन्होंने स्वीकार किया, क्योंकि वह लंबी रेस के लिए तैयार थीं।
प्रियंका ने कहा कि उस समय उनके मन में एक ही बात थी “मुझे करियर नहीं, विरासत चाहिए।” उन्होंने अपने एक पुराने इंटरव्यू को याद करते हुए बताया कि लगभग 11-12 साल पहले वह खुद को इसी विचार के साथ प्रेरित करती थीं। उस दौर में उनका लक्ष्य केवल अगला काम पाना या एक और मैगजीन कवर हासिल करना होता था, ताकि वह हर सुबह उठकर फिर से मेहनत करने का साहस जुटा सकें। उन्होंने स्वीकार किया कि कई बार हालात इतने कठिन होते थे कि भावनात्मक रूप से टूटने का मन करता था, लेकिन वह अपने आंसू पोंछकर, दोबारा मेकअप लगाकर और मुस्कुराते हुए कैमरे के सामने खड़ी हो जाती थीं।
आज सफलता की उनकी परिभाषा बदल चुकी है। प्रियंका ने कहा कि अब उनके लिए काम से ज्यादा महत्वपूर्ण परिवार है। निक जोनास की पत्नी और मालती मैरी की मां बनने के बाद उनकी प्राथमिकताएं बदली हैं। उनके अनुसार, असली सफलता यह है कि वह अपनी बेटी को स्कूल से लेने जा सकें, परिवार के साथ समय बिता सकें और अपने काम का चयन खुद कर सकें। उन्होंने कहा कि यह संतुलन ही उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि है।
इस कार्यक्रम में शशि थरूर ने भी प्रियंका की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि हार्वर्ड जैसे प्रतिष्ठित मंच पर पहुंचकर प्रियंका ने भारत को गौरवान्वित किया है। प्रियंका ने भी उनका आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वह हमेशा से उनकी वक्तृत्व कला और बुद्धिमत्ता की प्रशंसक रही हैं। संघर्ष, आत्मविश्वास और दृढ़ निश्चय की यह कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भी साबित करती है कि वैश्विक पहचान पाने के लिए धैर्य और निरंतर मेहनत ही असली कुंजी है।