रंगों का पर्व होली सिर्फ मस्ती और उत्साह का त्योहार नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और ज्योतिषीय मान्यताओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। फाल्गुन पूर्णिमा को होने वाला होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, वहीं अगले दिन मनाया जाने वाला रंगोत्सव लोगों के जीवन में खुशी, सकारात्मकता और आपसी प्रेम का संदेश देता है। देशभर में, खासकर वृंदावन और बरसाना में होली का उत्साह देखते ही बनता है, जबकि भारत के साथ-साथ नेपाल में भी यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।
परंपरा और पौराणिक कथा से जुड़ी रंगों की शुरुआत
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होली का संबंध भगवान कृष्ण और राधा की लीलाओं से भी जोड़ा जाता है। कथा के अनुसार बाल्यकाल में कृष्ण अपने सांवले रंग को लेकर चिंतित थे। तब माता यशोदा ने उन्हें राधा के पास जाकर रंग लगाने की सलाह दी। कहा जाता है कि तभी से होली पर रंग लगाने की परंपरा शुरू हुई और यह प्रेम व स्नेह का प्रतीक बन गई।
ज्योतिष में रंगों का विशेष महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार होली के दौरान ग्रहों की स्थिति का विशेष प्रभाव माना जाता है। मान्यता है कि अलग-अलग रंग विभिन्न ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते हैं और इनका प्रयोग करने से नकारात्मकता कम होती है तथा सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रंगों का त्योहार मौसम परिवर्तन के समय आता है, जब सर्दी समाप्त होकर गर्मी शुरू होती है, ऐसे में प्राकृतिक रंग स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं।
अलग-अलग रंग क्या दर्शाते हैं?
- हरा रंग — बुध ग्रह से जुड़ा माना जाता है। यह विकास, संतुलन और समृद्धि का प्रतीक है।
- पीला रंग — गुरु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है और ज्ञान, पवित्रता व खुशी का संकेत देता है।
- लाल रंग — मंगल ग्रह से संबंधित है, जो ऊर्जा, साहस और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
- गुलाबी रंग — शुक्र ग्रह से जुड़ा है और प्रेम, कोमलता व रिश्तों की मधुरता को दर्शाता है।
- नारंगी रंग — सूर्य से संबंध माना जाता है, जो उत्साह और सकारात्मकता का संदेश देता है।
- नीला रंग — शनि ग्रह से जुड़ा है और स्थिरता व विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
स्वास्थ्य और मौसम से जुड़ी मान्यताएं
परंपरागत मान्यता के अनुसार ऋतु परिवर्तन के समय संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ता है। पुराने समय में टेसू के फूल, हल्दी और अन्य प्राकृतिक तत्वों से बने रंगों का उपयोग किया जाता था, जिन्हें शरीर के लिए पुष्टि देने वाला माना जाता था। कई ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं को भी रंग लगाने की परंपरा इसी कारण से देखी जाती है।
प्राकृतिक रंगों के उपयोग की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक समय में रासायनिक रंगों के अत्यधिक उपयोग से त्वचा और आंखों को नुकसान हो सकता है। इसलिए होली खेलते समय प्राकृतिक और सुरक्षित रंगों का उपयोग करना बेहतर माना जाता है, ताकि त्योहार की खुशी के साथ स्वास्थ्य भी सुरक्षित रहे।
सामाजिक संदेश
होली का पर्व लोगों को आपसी मतभेद भुलाकर प्रेम और भाईचारे से जुड़ने का अवसर देता है। रंगों के माध्यम से समाज में समानता और सकारात्मकता का संदेश फैलता है। यही कारण है कि यह त्योहार सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक एकता का भी प्रतीक माना जाता है।
रंग-गुलाल की होली केवल परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, ज्योतिषीय और सांस्कृतिक महत्व से भरपूर उत्सव है, जो हर साल लोगों के जीवन में नई ऊर्जा और उमंग लेकर आता है।