भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म ‘इक्कीस’ अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो चुकी है। जो दर्शक इस भावनात्मक वॉर ड्रामा को सिनेमाघरों में नहीं देख पाए थे, उनके लिए अब इसे घर बैठे देखने का मौका है। फिल्म का एक्सक्लूसिव ग्लोबल प्रीमियर Prime Video पर किया गया है, जहां यह भारत समेत 200 से ज्यादा देशों में स्ट्रीमिंग के लिए उपलब्ध है।
सच्ची कहानी पर आधारित है ‘इक्कीस’
‘इक्कीस’ एक बायोग्राफिकल वॉर ड्रामा है, जो भारत के सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र विजेता अरुण खेत्रपाल की असाधारण सच्ची कहानी से प्रेरित है। सेकंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल ने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान बसंतर की लड़ाई में अदम्य साहस और नेतृत्व का परिचय दिया था। महज 21 साल की उम्र में उन्होंने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया और मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किए गए।
फिल्म का निर्देशन नेशनल अवॉर्ड विजेता श्रीराम राघवन ने किया है, जो अपनी सशक्त और संवेदनशील कहानी कहने के अंदाज के लिए जाने जाते हैं।
दमदार स्टारकास्ट
फिल्म में युवा अरुण खेत्रपाल की भूमिका अगस्त्य नंदा ने निभाई है। उनके अभिनय को काफी सराहा जा रहा है। वहीं धर्मेंद्र इस फिल्म में ब्रिगेडियर खेत्रपाल के किरदार में नजर आते हैं। यह उनकी आखिरी ऑन-स्क्रीन अपीयरेंस मानी जा रही है, जिसने फिल्म को और भी खास बना दिया है।
इसके अलावा जयदीप अहलावत, सिमर भाटिया और राहुल देव भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में दिखाई देते हैं।
फिल्म का निर्माण दिनेश विजन ने किया है और इसे Maddock Films के बैनर तले बनाया गया है। बिन्नी पड्डा ने इस प्रोजेक्ट को को-प्रोड्यूस किया है।
सिर्फ युद्ध नहीं, भावनाओं की कहानी
‘इक्कीस’ केवल एक युद्ध आधारित फिल्म नहीं है। यह कहानी एक पिता के दर्द और गर्व को भी दर्शाती है, जो अपने बेटे की यादों के सहारे जीने की कोशिश करता है। फिल्म युद्ध के मैदान की बहादुरी के साथ-साथ उसके बाद की खामोशी और टूटे परिवारों की पीड़ा को भी बारीकी से दिखाती है।
फिल्म में बहादुरी, इंसानियत, युद्ध की त्रासदी और बंटवारे के जख्म जैसे गहरे विषयों को संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। यही वजह है कि ‘इक्कीस’ एक्शन से ज्यादा भावनात्मक प्रभाव छोड़ती है।
कहां और कैसे देखें?
‘इक्कीस’ अब प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम हो रही है। जिन दर्शकों के पास प्राइम मेंबरशिप है, वे इसे बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के देख सकते हैं। यह फिल्म हिंदी समेत अन्य भाषाओं में भी उपलब्ध है, जिससे दुनिया भर के दर्शक इस वीर गाथा का अनुभव कर सकते हैं।
धर्मेंद्र की आखिरी फिल्म होने के साथ-साथ यह एक ऐसे युवा सैनिक की कहानी है, जिसने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। ‘इक्कीस’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि वीरता और समर्पण को सलाम करने वाली भावनात्मक श्रद्धांजलि है।