भोजपुरी संगीत जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। लोकप्रिय भोजपुरी सिंगर अंतरा सिंह के खिलाफ सोनभद्र में चल रहे देवी जागरण विवाद मामले ने अब गंभीर कानूनी रूप ले लिया है। विशेष एससी/एसटी अदालत ने उनके और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के संचालक विकास कुमार के खिलाफ धारा 84 BNSS के तहत कुर्की की नोटिस जारी की है। इससे पहले अदालत गैर-जमानती वारंट भी जारी कर चुकी थी।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 18 अप्रैल 2024 का बताया जा रहा है, जब सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के बहुअरा गांव में नवरात्रि के दौरान देवी जागरण कार्यक्रम आयोजित होना था। आयोजकों ने इवेंट मैनेजर के जरिए लगभग दो लाख रुपये में कार्यक्रम तय किया और करीब 1.70 लाख रुपये एडवांस के रूप में दिए।
आरोप है कि तय तारीख पर कार्यक्रम नहीं हुआ और कलाकार पक्ष प्रस्तुति दिए बिना वापस लौट गया। इससे आयोजकों को आर्थिक नुकसान हुआ। जब एडवांस राशि वापस मांगी गई, तो कथित तौर पर अभद्र भाषा का प्रयोग, धमकी और जातिसूचक टिप्पणी करने का आरोप लगाया गया।
दर्ज हुआ मुकदमा और जांच
आयोजकों की शिकायत पर विशेष एससी/एसटी अदालत के निर्देश के बाद रॉबर्ट्सगंज कोतवाली में धोखाधड़ी, आपराधिक धमकी और एससी/एसटी एक्ट सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया और मामला सुनवाई के चरण में पहुंचा।
अदालत का सख्त रुख
सुनवाई के दौरान आरोपियों की लगातार अनुपस्थिति को देखते हुए अदालत ने पहले गैर-जमानती वारंट जारी किया था। अब अदालत ने धारा 84 BNSS के तहत कुर्की की नोटिस जारी करते हुए पुलिस अधीक्षक सोनभद्र को निर्देश दिया है कि नोटिस की तामील कर आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इस कदम से साफ है कि अदालत मामले को गंभीरता से ले रही है और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 14 मार्च 2026 तय की है। फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही किया जाएगा। पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है और लोग आगे की कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।
मनोरंजन जगत में चर्चा
अंतरा सिंह भोजपुरी इंडस्ट्री की जानी-मानी आवाज मानी जाती हैं और उनके कई गाने दर्शकों के बीच लोकप्रिय रहे हैं। ऐसे में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की खबर ने इंडस्ट्री और फैंस दोनों का ध्यान खींचा है।
हालांकि, यह मामला अभी विचाराधीन है और अदालत के अंतिम फैसले का इंतजार किया जा रहा है। जब तक निर्णय नहीं आता, तब तक सभी आरोप न्यायिक जांच के दायरे में हैं।