मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ इन दिनों अपने कंटेंट से ज्यादा अपने टाइटल को लेकर विवादों में घिरी हुई है। फिल्म की घोषणा के बाद से ही देश के कई हिस्सों में इसके नाम को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ संगठनों ने फिल्म के टाइटल में इस्तेमाल किए गए ‘पंडित’ शब्द को लेकर आपत्ति जताई है और इसे ब्राह्मण समुदाय का अपमान बताया है। बढ़ते विवाद के बीच अब फिल्म के निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी ने पूरे मामले पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है और स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।
बढ़ते विरोध के बीच मेकर्स का बयान
फिल्म के टाइटल को लेकर जैसे-जैसे विरोध तेज हुआ, वैसे-वैसे सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर चर्चाएं बढ़ती चली गईं। कई जगहों पर प्रदर्शन हुए और कुछ संगठनों ने फिल्म के बहिष्कार की भी मांग की। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेकर्स की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया।
निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी, दोनों ने साफ शब्दों में कहा है कि फिल्म का उद्देश्य किसी भी समुदाय, जाति या धर्म की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं है।
मनोज बाजपेयी बोले– लोगों की भावनाओं का सम्मान करता हूं
मनोज बाजपेयी ने सोशल मीडिया पर एक लंबा बयान साझा करते हुए कहा कि वह लोगों की भावनाओं और चिंताओं को पूरी गंभीरता से लेते हैं। उन्होंने लिखा कि जब किसी रचना से किसी वर्ग को ठेस पहुंचती है, तो कलाकार के तौर पर यह जरूरी हो जाता है कि वह रुककर उनकी बात सुने।

मनोज बाजपेयी ने आगे स्पष्ट किया कि एक अभिनेता के रूप में वह केवल किरदार और कहानी के माध्यम से किसी फिल्म से जुड़ते हैं। उनके अनुसार, यह फिल्म एक गलत व्यक्ति और उसके आत्म-साक्षात्कार की यात्रा की कहानी है, न कि किसी समुदाय पर टिप्पणी।
उन्होंने निर्माता नीरज पांडे की भी सराहना करते हुए कहा कि उनके साथ काम करने के अनुभव में उन्होंने हमेशा देखा है कि नीरज अपनी फिल्मों को लेकर बेहद जिम्मेदार और संवेदनशील रहते हैं।
नीरज पांडे ने बताया– फिल्म पूरी तरह काल्पनिक है
फिल्म के निर्माता नीरज पांडे ने भी इंस्टाग्राम पर एक विस्तृत बयान जारी कर विवाद पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि ‘घूसखोर पंडित’ एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, जिसमें ‘पंडित’ शब्द का इस्तेमाल केवल एक काल्पनिक किरदार के उपनाम के तौर पर किया गया है। नीरज पांडे ने स्पष्ट किया कि फिल्म की कहानी पूरी तरह एक व्यक्ति के कर्मों और उसके फैसलों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी जाति, धर्म या समुदाय का प्रतिनिधित्व करना या उस पर टिप्पणी करना बिल्कुल नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्म निर्माता के रूप में वह अपने काम को हमेशा जिम्मेदारी और सम्मान के साथ करते हैं और उनकी कोशिश रहती है कि फिल्में मनोरंजन के साथ-साथ संवेदनशील भी हों।
प्रमोशनल सामग्री हटाने का फैसला
विवाद को गंभीरता से लेते हुए मेकर्स ने एक बड़ा कदम उठाया है। नीरज पांडे ने बताया कि दर्शकों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए फिल्म की सभी प्रमोशनल सामग्री को फिलहाल हटा दिया गया है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि किसी भी फिल्म को पूरी तरह देखने के बाद ही समझा जाना चाहिए, न कि केवल टाइटल या कुछ झलकियों के आधार पर। मेकर्स चाहते हैं कि दर्शक फिल्म को उसके वास्तविक संदर्भ में देखें।
एफएमसी ने टाइटल को लेकर भेजा नोटिस
इस विवाद के बीच फिल्म निर्माता संघ (एफएमसी) ने भी मेकर्स को नोटिस जारी किया है। एफएमसी का कहना है कि फिल्म के टाइटल के लिए अनिवार्य अनुमति नहीं ली गई थी। नोटिस में बताया गया कि नीरज पांडे, जो इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के सदस्य हैं, उन्होंने नियमों के अनुसार ‘घूसखोर पंडित’ टाइटल के इस्तेमाल के लिए आवेदन नहीं किया था। बिना अनुमति टाइटल के उपयोग को संघ ने अनुशासनहीनता माना है।
फिल्म में मनोज बाजपेयी बने हैं रिश्वतखोर पुलिस अधिकारी
रितेश शाह द्वारा निर्देशित इस फिल्म को नीरज पांडे ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म में मनोज बाजपेयी अजय दीक्षित नाम के एक पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं, जो रिश्वतखोरी में लिप्त है।फिल्म की स्टार कास्ट भी काफी मजबूत है। मनोज बाजपेयी के अलावा इसमें नुसरत भरूचा, कीकू शारदा, दिव्या दत्ता, साकिब सलीम, श्रद्धा दास और अक्षय ओबेरॉय अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे।
फिलहाल ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। हालांकि, मेकर्स और कलाकारों की ओर से आई सफाइयों के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि दर्शक फिल्म को किस नजर से देखते हैं और क्या फिल्म बिना किसी और रुकावट के रिलीज हो पाती है या नहीं।