असम की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को सम्मान देने का एक खास दृश्य उस समय देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रह्मपुत्र नदी पर बने कुमार भास्कर वर्मा सेतु पर पैदल चलते नजर आए। इस दौरान उनके गले में पारंपरिक असमिया ‘गमोसा’ था, जिसने इस पूरे पल को और भी प्रतीकात्मक बना दिया। यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति के प्रति सम्मान और जुड़ाव का संदेश था।
गमोसा असम की पहचान और सांस्कृतिक आत्मा का प्रतीक माना जाता है। वहां के लोग इसे गर्व, सम्मान और आत्मीयता से जोड़कर देखते हैं। किसी अतिथि का स्वागत करना हो, किसी को सम्मान देना हो या किसी शुभ अवसर को खास बनाना हो — गमोसा हर जगह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
क्या है गमोसा और कैसा होता है इसका स्वरूप
गमोसा पारंपरिक रूप से सूती कपड़े से बना होता है, जो आमतौर पर सफेद रंग का होता है और इसके किनारों पर लाल या मरून रंग की बारीक बुनाई होती है। कई गमोसों पर पारंपरिक डिजाइन और मोटिफ भी बनाए जाते हैं, जो असम की लोक कला और शिल्प परंपरा को दर्शाते हैं। इसे कंधे पर डाला जाता है या गले में पहनकर सम्मान व्यक्त किया जाता है।
हालांकि ‘गमोसा’ शब्द की जड़ें ‘गमछा’ से जुड़ी मानी जाती हैं, लेकिन असम में इसका महत्व एक साधारण कपड़े से कहीं ज्यादा है। यह सामाजिक संबंधों, आदर और सांस्कृतिक गर्व का प्रतीक है।
त्योहारों और सामाजिक जीवन में गमोसा का महत्व
असम के सबसे बड़े त्योहार बिहू में गमोसा का विशेष महत्व होता है। बिहू नृत्य और पारंपरिक कार्यक्रमों के दौरान युवक-युवतियां इसे धारण करते हैं। मेहमानों के स्वागत में गमोसा भेंट करना वहां की पुरानी परंपरा है, जो सम्मान और सद्भाव का संदेश देती है।
धार्मिक आयोजनों, सांस्कृतिक समारोहों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में भी गमोसा को बड़े गर्व के साथ इस्तेमाल किया जाता है। खास बात यह है कि यह असम के सभी समुदायों के बीच समान रूप से सम्मानित है और सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
प्रधानमंत्री का गमोसा पहनना क्यों रहा खास
प्रधानमंत्री मोदी का गमोसा पहनकर पुल पर पैदल चलना परंपरा और विकास के बीच संतुलन का संदेश देता है। यह संकेत था कि देश के विकास के साथ-साथ स्थानीय संस्कृति और विरासत को भी उतनी ही अहमियत दी जानी चाहिए।
कुमार भास्कर वर्मा सेतु ब्रह्मपुत्र नदी पर बना एक महत्वपूर्ण पुल है, जो क्षेत्र में आवागमन को आसान बनाने और विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे महत्वपूर्ण स्थान पर गमोसा पहनना असम की पहचान को राष्ट्रीय मंच पर सम्मान देने जैसा माना गया।
असम की आत्मा का प्रतीक
आज गमोसा को केवल एक परिधान नहीं, बल्कि असम की आत्मा का प्रतीक माना जाता है। यह सादगी, सम्मान और सांस्कृतिक गौरव का संदेश देता है। इसे पहनना या भेंट करना लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री के इस कदम ने देशभर का ध्यान असम की समृद्ध परंपराओं की ओर आकर्षित किया है। यह याद दिलाता है कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है, जहां हर राज्य की अपनी अनूठी पहचान है और उसे सम्मान देना हम सभी की जिम्मेदारी है।