फिल्म अभिनेता राजपाल यादव हाल ही में चेक बाउंस मामले में कुछ समय तिहाड़ जेल में रहने के बाद अंतरिम जमानत पर रिहा हुए हैं। जेल से बाहर आते ही उन्होंने न्यायालय का आभार जताया और जेल व्यवस्था को लेकर अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान उन्होंने एक ऐसी मांग रखी, जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया उनका कहना है कि एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशन की तरह जेलों में भी अलग से स्मोकिंग एरिया होना चाहिए।
दिल्ली हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद जब राजपाल यादव अपने पैतृक गांव शाहजहांपुर पहुंचे, तो उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि जेलों का मकसद केवल सजा देना नहीं बल्कि सुधार करना होना चाहिए। उनके मुताबिक, कई कैदी ऐसे होते हैं जो पहली बार गलती करते हैं और पेशेवर अपराधी नहीं होते, इसलिए उन्हें सुधार का अवसर मिलना चाहिए।
राजपाल यादव ने कहा कि जेलों को आज के समय के अनुसार अपग्रेड करने की जरूरत है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि “यह मेरी हाथ जोड़कर विनती है कि जेलों में व्यवस्था बेहतर हो। हमें नहीं पता कि कौन सच में अपराधी है और कौन परिस्थितियों का शिकार। जिन लोगों का व्यवहार वर्षों से अच्छा है, उन्हें एक मौका मिलना चाहिए।”
उन्होंने एक दिलचस्प उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे टीवी शो “कौन बनेगा करोड़पति” में प्रतिभागियों को लाइफलाइन मिलती है, वैसे ही कैदियों को भी एक ‘लाइफलाइन’ दी जानी चाहिए ताकि वे समाज में सकारात्मक योगदान दे सकें। उनका मानना है कि अगर सुधार का मौका दिया जाए तो कई लोग देश की ताकत बन सकते हैं।
स्मोकिंग एरिया की मांग पर उन्होंने कहा कि जेलों में धूम्रपान करने वालों के लिए एक निर्धारित जगह होनी चाहिए, ताकि अनुशासन भी बना रहे और कैदियों को असुविधा न हो। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया और लोगों के बीच बहस छेड़ दी है।
राजपाल यादव ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अगले दो दिनों तक मीडिया से ज्यादा बातचीत नहीं कर पाएंगे क्योंकि उनके परिवार में शादी का कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि कानूनी मामलों से जुड़े सवालों के जवाब उनके वकील देंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह सहानुभूति नहीं चाहते बल्कि अपने काम और मेहनत पर ध्यान देना चाहते हैं।
अगर मामले की बात करें तो राजपाल यादव ने एक फिल्म प्रोजेक्ट के लिए एक कंपनी से लगभग 5 करोड़ रुपये लिए थे, जो ब्याज के साथ बढ़कर करीब 9 करोड़ रुपये हो गए। कंपनी को दिया गया चेक बाउंस हो गया, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा। कोर्ट ने कई बार भुगतान के लिए समय दिया लेकिन रकम जमा नहीं हो पाई, जिसके चलते उन्हें सरेंडर करना पड़ा।
हालांकि बाद में अदालत ने 1.5 करोड़ रुपये जमा कराने के बाद उन्हें 18 मार्च तक अंतरिम जमानत दे दी। जेल से बाहर आने के बाद उनका फोकस अब काम पर लौटने और आर्थिक स्थिति सुधारने पर है।
राजपाल यादव के इस बयान ने एक बार फिर जेल सुधार और कैदियों के अधिकारों पर चर्चा को तेज कर दिया है। जहां कुछ लोग उनकी बात को व्यावहारिक मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे विवादित मांग बता रहे हैं। आने वाले दिनों में देखना होगा कि उनकी यह अपील नीति स्तर पर किसी चर्चा का हिस्सा बनती है या नहीं।