‘वध 2’, चार साल पहले आई फिल्म ‘वध’ का सीक्वल, दर्शकों को फिर से अपराध, रहस्य और भावनाओं के गहरे जाल में बांधने के लिए तैयार है। जसपाल सिंह संधू के निर्देशन में बनी यह फिल्म दो बुजुर्गों की सधी हुई प्रेम कहानी को क्राइम थ्रिलर के सटीक अंदाज में पेश करती है।
कहानी की शुरुआत होती है ईमानदार पुलिसवाले शंभू नाथ मिश्रा (संजय मिश्रा) और उनकी पत्नी मंजू (नीना गुप्ता) से। दोनों का रिश्ता वर्षों की कठिनाइयों और जेल की दूरी के बावजूद गहरा और मजबूत है। शंभू नाथ अपने बेटे की पढ़ाई के लिए कर्ज में डूबे हुए हैं और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जेल से सब्जियां चुराकर बेचते हैं। इस बीच जेल में नया अफसर प्रकाश सिंह (कुमुद मिश्रा) तबादले के बाद हंगामा खड़ा करता है।
कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब विधायक के भाई केशव (अक्षय डोगरा) जेल में अन्याय और गुंडागर्दी करता है। जेल वॉर्डन रजनी (शिल्पा शुक्ला) और नई कैदी नैना (योगिता बिहानी) की सुरक्षा खतरे में पड़ती है। एक रात केशव रहस्यमय तरीके से जेल से गायब हो जाता है, और मामले की जांच जिम्मेदार और निष्ठावान पुलिस अधिकारी अतीत सिंह (अमित के सिंह) को सौंप दी जाती है।
फिल्म का सेकंड हाफ दर्शकों को लगातार ट्विस्ट और टर्न में बांधे रखता है। कहानी में न्याय और अन्याय के बीच संतुलन, जातिवाद और इंसानी रिश्तों की जटिलताएं बड़ी बारीकी से दिखाई गई हैं। निर्देशक जसपाल सिंह संधू ने पुराने किरदारों की गहराई के साथ नए किरदारों को भी प्रभावशाली ढंग से पेश किया है।
संजय मिश्रा और नीना गुप्ता की परफॉर्मेंस फिल्म की जान है। उनकी सधी हुई अदाकारी किरदारों के भीतर की भावनाओं और संघर्ष को विश्वसनीय बनाती है। कुमुद मिश्रा, अक्षय डोगरा और शिल्पा शुक्ला ने अपने छोटे और बड़े किरदारों को स्मरणीय बना दिया है। सिनेमैटोग्राफी (सपना नरूला) और बैकग्राउंड स्कोर (अद्वैत नेमलेकर) ने रहस्य और थ्रिल को बढ़ाया है, जबकि रोचक कोहली का संगीत कहानी में भावनात्मक गहराई जोड़ता है।
‘वध 2’ एक सधी हुई क्राइम थ्रिलर है, जो अपनी कहानी, सस्पेंस और दमदार एक्टिंग के बल पर दर्शकों को पूरी तरह बांधती है। यह फिल्म साबित करती है कि मजबूत कहानी और कुशल कलाकार ही दर्शकों पर गहरा असर छोड़ सकते हैं, चाहे बड़े सितारे हों या न हों।