राजन शाही का ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ गणपति विसर्जन के दौरान मायरा और अरमान के रिश्ते में एक इमोशनल मोड़ दिखाने वाला है। अपने माता-पिता के फैसले से मायरा का दुख अब भी कम नहीं हुआ है। गणपति विसर्जन के शुभ मौके पर पूरा परिवार एक साथ आता है, लेकिन मायरा अपने जज्बातों से जूझती नजर आती है। वह अब भी अरमान से नाराज है और जो कुछ हुआ उसके लिए उसे माफ नहीं कर पाई है।
हालांकि, इसी बीच कहानी में एक अनपेक्षित मोड़ आता है जब कबीर अरमान का सामना करता है। मायरा अपने पिता से नाराज होने के कारण चुप रह सकती थी, लेकिन वह सभी को हैरान करते हुए अरमान के लिए खड़ी हो जाती है। वह कबीर को वहां से जाने के लिए कहती है और साफ कर देती है कि अपने पिता से मतभेद होने के बावजूद वह किसी को भी उनका अपमान करने की इजाजत नहीं देगी।
मायरा का यह रिएक्शन अरमान को भावुक कर देता है। उसे एहसास होता है कि उसकी बेटी अब भी आहत है और उसके फैसले को पूरी तरह स्वीकार नहीं कर पाई है, लेकिन इसके बावजूद अपने माता-पिता के लिए उसके दिल में सम्मान और प्यार अब भी कायम है।
इसके बाद मायरा अपनी भावनाओं के बारे में खुलकर बात करती है और साफ करती है कि वह अरमान के फैसले से मिली तकलीफ को नहीं भूली है। साथ ही, वह यह भी मानती है कि वह अपने माता-पिता के लिए हमेशा से रहे सम्मान को इतनी आसानी से खत्म नहीं कर सकती। उसकी बातें अरमान को भावुक और अपराधबोध से भर देती हैं।
यह पल अरमान के लिए काफी अहम बन जाता है, क्योंकि उसे मायरा की भावनाओं की गहराई समझ आने लगती है। मायरा अपने फैसले पर कायम रहती है, लेकिन अरमान का बचाव करने का उसका फैसला दिखाता है कि मुश्किल दौर में भी माता-पिता और बच्चे के बीच का रिश्ता मजबूत रह सकता है।
आने वाला ट्रैक मायरा, अरमान और कबीर के बीच एक इमोशनल टकराव दिखाने वाला है। इस दौरान मायरा अपनी नाराजगी और अपने माता-पिता के लिए कायम सम्मान के बीच उलझी नजर आएगी।