अभिनेता दुश्यंत वाघ इन दिनों राजन शाही और दीपा शाही के पॉपुलर शो ‘अनुपमा’ में बंकू के किरदार में नजर आ रहे हैं। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में दो दशक से ज्यादा समय बिता चुके दुश्यंत ने अपने करियर में कई तरह के किरदार निभाए हैं। हालांकि, अभिनय के अलावा भी वह उन चीजों पर विचार करते हैं जो इंसान और समाज को प्रभावित करती हैं। अपनी बातों में वह निजी स्पेस, सेल्फ-अवेयरनेस, रिश्तों और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को खास महत्व देते हैं।
दुश्यंत के लिए घर सिर्फ एक फिजिकल स्पेस नहीं, बल्कि एक ऐसा भावनात्मक सहारा है जिसकी जरूरत हर व्यक्ति को होती है। वह कहते हैं, “मेरी नजर में हर व्यक्ति के लिए यह बहुत जरूरी है। घर जिंदगी का एंकर है। दिन के आखिर में हो, कोई इमोशनल पल हो या कोई भी परिस्थिति, इंसान वापस वहीं आता है। यह सिर्फ पुरुष या महिला की बात नहीं है। हर व्यक्ति को ऐसी जगह चाहिए जो उसकी अपनी हो, जहां वह वापस आ सके और शांति महसूस कर सके।”
अभिनेता का मानना है कि रिश्तों में आने वाले विवादों को संभालने के लिए सेल्फ-अवेयरनेस बेहद जरूरी है। वह कहते हैं, “जब लोग खुद के बारे में जागरूक और इतने मैच्योर नहीं होते कि अपनी गलती स्वीकार कर सकें, तब चीजें उलझने लगती हैं। किसी पर उंगली उठाने से पहले हर किसी को यह देखना चाहिए कि वह खुद कहां गलत है। किसी को दोष देना आसान है, लेकिन उन्हीं नियमों से खुद को आंकना काफी मुश्किल है। ऐसी परिस्थितियों में मैं बात करके चीजों को सुलझाना पसंद करता हूं।”
दुश्यंत यह भी मानते हैं कि जिंदगी में लगातार किसी लक्ष्य के पीछे भागने से कई बार इंसान उन रिश्तों को नजरअंदाज करने लगता है, जो उसके लिए पहले से मौजूद होते हैं। वह कहते हैं, “अगर आप जिंदगी में लगातार किसी चीज का पीछा कर रहे हैं, तो कई बार आप यह भूल जाते हैं कि आपके पास पहले से क्या है, खासकर आपके आसपास के लोग। महत्वाकांक्षा आपको आगे बढ़ने के लिए मोटिवेट करती है, लेकिन जब आप अपने लक्ष्य पर जरूरत से ज्यादा फोकस हो जाते हैं तो आसपास के लोगों को कम महत्व देने लगते हैं। इससे रिश्तों को नुकसान पहुंच सकता है और आप उन्हें खो भी सकते हैं। इसलिए लोगों को संजोना और उनकी कद्र करना सबसे जरूरी है।”
समाज से जुड़े उन मुद्दों के बारे में पूछे जाने पर जिन पर वह ज्यादा चर्चा देखना चाहते हैं, दुश्यंत ने कई विषयों का जिक्र किया। इनमें बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण से जुड़ी चिंताएं, बिना भेदभाव के शिक्षा और पीने के पानी को सुरक्षित रखना जैसे मुद्दे शामिल हैं।
अंत में दुश्यंत ने कहा, “आइए समाज को सेल्फ-अवेयर और सेल्फ-सफिशिएंट बनाना सिखाएं।”