अभिनेत्री वैश्णवी गणात्रा इन दिनों राहुल कुमार तेवारी के शो ‘जगद्धात्री’ में आरना का किरदार निभा रही हैं। शो में अपने किरदार के जरिए वह कई तरह के इमोशनल शेड्स एक्सप्लोर कर रही हैं। रिश्तों की जटिलताओं से लेकर किरदार के कमजोर और संवेदनशील पलों को पर्दे पर उतारने तक, वैश्णवी का कहना है कि आरना ने उन्हें एक परफॉर्मर के तौर पर आगे बढ़ने का मौका दिया है।
टेलीविजन के किसी किरदार से दर्शकों के जुड़ाव और एक्टर की पहचान बनने को लेकर वैश्णवी कहती हैं, “मुझे लगता है कि खासकर टेलीविजन में किसी किरदार से पहचान बनना स्वाभाविक है, क्योंकि दर्शक आपके साथ काफी समय बिताते हैं और आपको एक किरदार के साथ जोड़ने लगते हैं। लेकिन मैं जानबूझकर उस धारणा को बदलने की कोशिश नहीं करती। मेरे लिए लगातार एक एक्टर के तौर पर अलग-अलग शेड्स एक्सप्लोर करना ज्यादा जरूरी है।”
वैश्णवी के मुताबिक, आरना के किरदार ने उन्हें एक परफॉर्मर के तौर पर अपनी कई अलग-अलग साइड्स दिखाने का मौका दिया है। वह कहती हैं, “आरना के साथ भी मुझे उसकी कई अलग-अलग भावनाओं और पहलुओं को दिखाने का मौका मिला है और यही चीज मेरे लिए इसे एक्साइटिंग बनाती है। मुझे लगता है कि अगर मैं अपने काम और चुने गए प्रोजेक्ट्स के जरिए खुद को लगातार चैलेंज करती रहूं, तो दर्शक भी स्वाभाविक रूप से मेरे अलग-अलग पहलुओं को देखेंगे।”
अभिनेत्री का मानना है कि किसी किरदार को बेहतर तरीके से समझने में एक्टर का क्रिएटिव इनपुट भी मदद कर सकता है। वह कहती हैं, “बातचीत की गुंजाइश जरूर होती है। मैं इसे राइटिंग को चैलेंज करने के तौर पर नहीं देखती, बल्कि किरदार को मिलकर समझने के तौर पर देखती हूं। अगर मुझे सच में लगता है कि किसी खास पल में मेरा किरदार अलग तरह से रिएक्ट करेगा, तो मैं अपनी बात डायरेक्टर या क्रिएटिव टीम के साथ शेयर करती हूं और फिर हम चर्चा करते हैं कि सीन के लिए क्या बेहतर रहेगा।”
टेलीविजन की तेज रफ्तार के बारे में बात करते हुए वैश्णवी कहती हैं कि यह कलाकारों को तेजी से एडजस्ट करना भी सिखाता है। कई बार कलाकारों को किसी सीन को समझने और तैयार होने के लिए बहुत कम समय मिलता है। ऐसे मौकों पर वह इमोशन को तुरंत परफॉर्म करने का दबाव नहीं लेतीं, बल्कि पहले यह समझने की कोशिश करती हैं कि उस पल का किरदार के लिए क्या मतलब है।
वैश्णवी के मुताबिक, जब वह यह समझ लेती हैं कि उस सिचुएशन में आरना क्या महसूस कर रही है, तो सीन खुद-ब-खुद उन्हें उस इमोशन तक ले जाता है।
आरना और खुद के बीच अंतर बनाए रखने को लेकर वैश्णवी कहती हैं कि उनके हर किरदार में उनकी पर्सनैलिटी का थोड़ा हिस्सा जरूर रहता है। लेकिन परफॉर्म करते समय अगर वह यह सोचने लगें कि “वैश्णवी क्या करेगी?”, तो उन्हें खुद को रोककर यह सोचना पड़ता है कि “आरना क्या करेगी?”। अभिनेत्री के मुताबिक, यही सोच उन्हें दोबारा अपने किरदार में लौटने में मदद करती है।