मुंबई। हर साल जन्माष्टमी का पर्व भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर रहता है। इस पावन अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं और उनके प्रेम को समर्पित कई बॉलीवुड गीत श्रोताओं के दिलों को छू जाते हैं। ये गीत न केवल भक्ति का भाव जगाते हैं, बल्कि कृष्ण की नटखटता, राधा के प्रेम, यशोदा की ममता और भक्त मीरा के समर्पण को भी बखूबी दर्शाते हैं।
बॉलीवुड ने समय-समय पर श्रीकृष्ण के विभिन्न रूपों को गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया है – चाहे वह बाल लीलाएं हों, रासलीला हो, या फिर भक्तिभाव से ओतप्रोत मीरा का समर्पण। आइए जानें ऐसे ही कुछ अमर गीतों के बारे में जो हर जन्माष्टमी पर एक नई चेतना भरते हैं।
“यशोमती मैया से बोले नंदलाला”

श्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं पर आधारित यह कालजयी गीत यशोदा और नंदलाल (कृष्ण) के स्नेहपूर्ण संवाद को दर्शाता है। फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम में शशि कपूर और जीनत अमान ने अभिनय किया है। इस गीत में भगवान कृष्ण की मासूमियत और बाल सुलभ जिज्ञासा बेहद भावुक तरीके से चित्रित की गई है।
राधा कैसे न जले” (लगान – 2001)

इस गीत में राधा के हृदय में उठती ईर्ष्या और प्रेम की भावना को बखूबी दर्शाया गया है। गोपियों के बीच कान्हा का आकर्षण और राधा की जलन भावनात्मक रूप से गीत में समाहित है। आमिर खान और ग्रेसी सिंह पर फिल्माया गया यह गाना राधा-कृष्ण के प्रेम की गहराई में उतरता है।
“वो किसना है” (किसना – 2005)

फिल्म किसना: द वॉरियर पोएट का यह शीर्षक गीत श्रीकृष्ण की महिमा और उनके दिव्य स्वरूप को दर्शाता है। विवेक ओबेरॉय पर फिल्माए इस गाने में कृष्ण के नटखट और रासलीला वाले स्वरूप को सुंदर संगीत के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
“मच गया शोर सारी नगरी रे” (खुद्दार – 1982)

अमिताभ बच्चन और जयाप्रदा पर फिल्माया गया यह गीत जन्माष्टमी की धूमधाम और मस्ती को जीवंत कर देता है। वृंदावन की गलियों में गूंजती नटखट लीलाओं का यह चित्रण आज भी झूमने पर मजबूर कर देता है।
“मोहे पनघट पे नंदलाल” (मुगल-ए-आजम – 1960)

मधुबाला पर फिल्माया गया यह गीत श्रीकृष्ण की रासलीला को रोमांटिक और सांस्कृतिक तरीके से दर्शाता है। नौशाद की संगीत रचना और लता मंगेशकर की जादुई आवाज ने इसे अमर बना दिया है।
“बड़ा नटखट है रे” (अमर प्रेम – 1972)
श्रीकृष्ण के बाल रूप को दिखाता यह गीत, जिसमें शर्मिला टैगोर बालकृष्ण के प्रति ममता दिखाती हैं, कृष्ण की बाल लीलाओं को बहुत कोमलता से दर्शाता है। लता मंगेशकर की आवाज इस गाने को और भी भावुक बना देती है।
“मेरे तो गिरधर गोपाल” (मीरा – 1979)

हेमा मालिनी द्वारा निभाया गया मीरा का किरदार और वाणी जयराम की भक्ति भरी आवाज इस गीत को दिव्यता से भर देती है। पंडित रविशंकर का संगीत इस भजन को कालजयी बना देता है। यह गीत मीरा के समर्पण और कृष्ण भक्ति की पराकाष्ठा को दर्शाता है।
“एक राधा एक मीरा” (राम तेरी गंगा मैली – 1985)

यह गीत राधा और मीरा की भक्ति की तुलना करता है — एक प्रेमिका, दूसरी भक्त। मंदाकिनी पर फिल्माए इस गीत में कृष्ण प्रेम के दोनों पहलुओं को दर्शाया गया है — सांसारिक और आध्यात्मिक।
“मोहे रंग दो लाल” (बाजीराव मस्तानी – 2015)

राधा-कृष्ण की रासलीला से प्रेरित यह गीत दीपिका पादुकोण द्वारा निभाई गई मस्तानी की प्रस्तुति है। रणवीर सिंह के सामने मस्तानी का नृत्य और रास भाव इस गीत को अत्यंत मोहक बनाता है।
“मन मोहना” (जोधा अकबर – 2008)

ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय पर फिल्माया गया यह भजन भगवान कृष्ण की अराधना है। ए.आर. रहमान का संगीत और बेला शेंडे की मधुर आवाज इस गीत को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।