ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ट्रू क्राइम डॉक्यूमेंट्रीज़ आजकल दर्शकों को खींच रही हैं। लोग रियल‑लाइफ कहानियों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो अक्सर काल्पनिक कहानियों से भी ज्यादा डरावनी होती हैं।

इन डॉक्यूमेंट्रीज़ का आकर्षण उनकी सच्चाई और सबूतों में छुपा होता है। दर्शक घटनाओं की गहराई में जाकर रहस्य और सस्पेंस को महसूस करते हैं।

इसी श्रेणी में प्राइम वीडियो की सीरीज़ “Dancing On The Grave” है। यह डॉक्यूमेंट्री 1990 के दशक की एक भयानक घटना की पड़ताल करती है, जिसने पूरे बेंगलुरु को हिला दिया था।

यह चार‑भाग वाली इन्क्वेस्टिव डॉक्यूमेंट्री अप्रैल 2023 में रिलीज़ हुई थी। इसे इंडिया टुडे ऑरिजिनल्स के तहत प्रोड्यूस किया गया है और यह प्राइम वीडियो का पहला भारतीय ट्रू‑क्राइम डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ है।

सीरीज़ का फोकस शकीरह खलीली के क़त्ल पर है। इस केस की हर डिटेल को पेश करने के लिए डॉक्यूमेंट्री में सबूत, गवाहों के बयान और आधिकारिक रिकॉर्ड शामिल किए गए हैं।

शकीरह खलीली दक्षिण भारत के एक प्रमुख परिवार की वारिस थीं। वे सर मिर्ज़ा इस्माइल की पोती थीं, जो मैसूर, जयपुर और हैदराबाद के पूर्व दीवान थे।

शकीरह 1991 में अपने घर, रिचमंड टाउन, बेंगलुरु से लापता हो गई थीं। उनकी अचानक गायब होने की खबर ने शुरुआत में किसी को गंभीर चिंता में नहीं डाला।

तीन साल बाद, एक भयावह सच्चाई सामने आई। उनकी अस्थियां उनके ही घर, 81 रिचमंड हाउस में लकड़ी के ताबूत में दफन मिलीं।

पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि शकीरह को पहले नशीला पदार्थ दिया गया और फिर उन्हें ज़िंदा दफन कर दिया गया। यह मामला शुरू में लापता व्यक्ति के रूप में दर्ज हुआ था, लेकिन धीरे‑धीरे यह भारत के सबसे चौंकाने वाले हत्या मामलों में से एक बन गया।

डॉक्यूमेंट्री का उद्देश्य दर्शकों को इस भयानक हत्या की पूरी कहानी दिखाना है। सबूतों और गवाहों के माध्यम से इसे प्रस्तुत करते हुए, सीरीज़ धीरे‑धीरे सच्चाई को उजागर करती है, जो देखने वालों के लिए बेहद रोमांचक और डरावनी है।