अगर आपको रात में नींद आने में दिक्कत होती है, बार-बार नींद टूटती है या दिमाग लगातार सक्रिय रहता है, तो इसका कारण किसी स्लीप ऐप या हर्बल चाय की कमी नहीं बल्कि शरीर में मैग्नीशियम की कमी हो सकती है।
हाल के वर्षों में डॉक्टरों और स्लीप एक्सपर्ट्स ने इस जरूरी मिनरल पर खास ध्यान देना शुरू किया है, जो शरीर को आराम की स्थिति में लाने में अहम भूमिका निभाता है। मैग्नीशियम दिमाग, नसों और मांसपेशियों को शांत करने के साथ-साथ स्ट्रेस हार्मोन्स को नियंत्रित करने में मदद करता है। बेंगलुरु स्थित एस्टर व्हाइटफील्ड अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार, मैग्नीशियम 300 से अधिक बायोकेमिकल रिएक्शन्स में शामिल होता है, जिनमें से कई नींद और न्यूरोलॉजिकल हेल्थ से जुड़े होते हैं।
यह मिनरल GABA जैसे न्यूरोट्रांसमीटर को सक्रिय करता है, जो दिमाग को शांत करने का काम करता है। मैग्नीशियम की कमी से दिमाग जरूरत से ज्यादा सक्रिय रहता है, जिससे बेचैनी और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। इसके अलावा यह मांसपेशियों को भी रिलैक्स करता है और रात में होने वाले क्रैम्प्स या रेस्टलेस लेग सिंड्रोम जैसी परेशानियों को कम करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मैग्नीशियम का संतुलित स्तर शरीर को प्राकृतिक रूप से नींद के लिए तैयार करता है। सही आहार और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्स के जरिए इस मिनरल की कमी को दूर किया जा सकता है, जिससे न सिर्फ नींद बल्कि समग्र स्वास्थ्य में भी सुधार होता है।