बॉलीवुड में इन दिनों एक गाने को लेकर जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है। अरमान मलिक ने हाल ही में नोरा फतेही और Sanjay Dutt पर फिल्माए गए गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यह गाना फिल्म KD का हिस्सा है और रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गया है।
इस गाने के लिरिक्स और इसकी कोरियोग्राफी को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार आलोचना हो रही है। कई यूजर्स का कहना है कि इसमें ‘डबल मीनिंग’ शब्दों का इस्तेमाल किया गया है, जो न सिर्फ अश्लील हैं बल्कि महिलाओं की छवि को भी गलत तरीके से पेश करते हैं। इसी बीच अरमान मलिक का बयान इस विवाद को और हवा दे गया है।
अरमान मलिक ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट शेयर करते हुए गाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने लिखा कि जब यह गाना उनकी टाइमलाइन पर आया, तो उन्हें यकीन नहीं हुआ कि उन्होंने जो सुना, वह सही है या नहीं। इसलिए उन्होंने इसे दोबारा सुना, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी। उन्होंने कहा कि कमर्शियल सफलता पाने के लिए जिस तरह से गानों का स्तर गिराया जा रहा है, वह बेहद दुखद है।
जब एक फैन ने उनसे पूछा कि ऐसे भद्दे और आपत्तिजनक लिरिक्स को आखिर किसने मंजूरी दी, तो अरमान ने जवाब देते हुए कहा कि उनके पास इस पर कहने के लिए शब्द ही नहीं हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि काश उन्होंने यह गाना सुना ही न होता।
इस पूरे मामले में केवल अरमान मलिक ही नहीं, बल्कि आम दर्शक भी अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सेंसर बोर्ड पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि इस तरह के ‘वल्गर’ और ‘सेक्सुअल इशारों’ से भरे गाने को पास करना बेहद चौंकाने वाला है।
कुछ यूजर्स ने तो इसे भारतीय संस्कृति और महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताया है। एक यूजर ने लिखा कि इस तरह के गाने महिलाओं को ‘ऑब्जेक्ट’ बनाकर पेश करते हैं, जो पूरी तरह गलत है। वहीं, दूसरे यूजर ने सवाल उठाया कि क्या इस तरह की प्रस्तुति को डांस कहा जा सकता है।

बताया जा रहा है कि इस गाने को एक डांस बार सेटअप में शूट किया गया है, जिसमें नोरा फतेही के साथ कई बैकग्राउंड डांसर्स नजर आ रहे हैं। गाने की कोरियोग्राफी और लिरिक्स दोनों को लेकर लगातार बहस जारी है।
‘सरके चुनर तेरी सरके’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। जहां एक तरफ यह गाना चर्चा में बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर यह बहस भी तेज हो गई है कि मनोरंजन के नाम पर आखिर किस हद तक जाना सही है।