भारत में साड़ी केवल पहनावा नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और भावनात्मक विरासत का प्रतीक मानी जाती है। कई परिवारों में साड़ियों को पीढ़ी दर पीढ़ी सहेजकर रखा जाता है। शादी, त्योहार या किसी खास मौके पर मां या दादी की साड़ी पहनना आज भी गर्व और भावनाओं से जुड़ा होता है। लेकिन सबसे बड़ी चुनौती यह होती है कि इन कीमती साड़ियों को लंबे समय तक कैसे सुरक्षित रखा जाए, ताकि उनका रंग, बुनावट और चमक बरकरार रहे।
इसी विषय पर मशहूर सेलिब्रिटी साड़ी ड्रेपर डॉली जैन ने हाल ही में अहम जानकारी साझा की है। डॉली जैन बॉलीवुड और उद्योग जगत की कई नामी हस्तियों जैसे आलिया भट्ट, प्रियंका चोपड़ा और नीता अंबानी की साड़ियों को ड्रेप करने के लिए जानी जाती हैं। अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने बताया कि महंगी कांजीवरम, बनारसी और असली ज़री वाली साड़ियों को सही तरीके से स्टोर करना कितना जरूरी है।
डॉली जैन ने यह सलाह भारतीय-अमेरिकी फैशन उद्यमी पर्निया कुरैशी के साथ बातचीत के दौरान दी। यह बातचीत इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में देखने को मिली, जिसमें डॉली ने साड़ी स्टोरेज से जुड़ी आम गलतियों और सही तरीकों को सरल भाषा में समझाया।
साड़ी स्टोर करने में सबसे बड़ी गलती क्या है?
डॉली जैन के अनुसार, लोग अक्सर महंगी साड़ियों को मोड़कर अलमारी में रख देते हैं, जो सबसे बड़ी गलती है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांजीवरम और असली ज़री की साड़ियों को कभी भी लंबे समय तक फोल्ड करके नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से साड़ी पर स्थायी सिलवटें पड़ जाती हैं, जो बाद में आसानी से नहीं जातीं।
उन्होंने बताया कि खासतौर पर बनारसी साड़ियों में बुनावट इतनी नाज़ुक और जटिल होती है कि एक बार फोल्ड की गई सिलवट हमेशा के लिए रह सकती है। इन निशानों को हटाने के लिए तेज़ गर्मी यानी आयरन का सहारा लेना पड़ता है, जो साड़ी के कपड़े और ज़री दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है।
महंगी साड़ियों को रखने का सही तरीका
डॉली जैन का सुझाव सरल है लेकिन बेहद प्रभावी। उनका कहना है कि साड़ियों को मोड़ने की बजाय रोल करके रखा जाना चाहिए। साड़ी को धीरे-धीरे रोल करें और फिर उसे मुलायम मलमल (मसलिन) के कपड़े में लपेट दें। यह तरीका साड़ी को हवा, नमी और सिलवटों से बचाने में मदद करता है।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति एक या दो लाख रुपये की साड़ी खरीदता है, तो उसे सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है। अगर बार-बार साड़ी पर गर्म आयरन का इस्तेमाल किया जाएगा, तो न सिर्फ उसकी उम्र कम होगी, बल्कि अगली पीढ़ी तक उसे सुरक्षित रखना भी मुश्किल हो जाएगा।
गर्मी और आयरन से क्यों बचना जरूरी है
डॉली जैन ने बताया कि ज़्यादा गर्मी साड़ियों के लिए सबसे बड़ा दुश्मन है। तेज़ हीट से ज़री का रंग फीका पड़ सकता है, रेशमी धागे कमजोर हो सकते हैं और कपड़े की चमक खत्म हो सकती है। यही वजह है कि उन्होंने साफ कहा कि साड़ियों पर अनावश्यक रूप से आयरन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
उनका मानना है कि अगर साड़ी को सही तरीके से रोल करके रखा जाए, तो उसे बार-बार प्रेस करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इससे साड़ी लंबे समय तक नई जैसी बनी रहेगी।
विरासत को संभालने की जिम्मेदारी
डॉली जैन की यह सलाह केवल फैशन से जुड़ी नहीं है, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने से भी जुड़ी है। कांजीवरम और बनारसी साड़ियां सिर्फ कपड़े नहीं होतीं, बल्कि इनमें कारीगरों की मेहनत, कला और इतिहास समाया होता है। सही देखभाल के जरिए इन साड़ियों को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि साड़ी को सही तरीके से स्टोर करना एक तरह का निवेश है। अगर आज सावधानी रखी जाए, तो भविष्य में वही साड़ी बेटी या बहू को गर्व के साथ सौंपी जा सकती है।
डॉली जैन की सलाह उन सभी महिलाओं के लिए बेहद उपयोगी है जो अपनी कीमती साड़ियों को लंबे समय तक सुरक्षित रखना चाहती हैं। कांजीवरम और बनारसी साड़ियों को फोल्ड करने की बजाय रोल करके मलमल के कपड़े में लपेटकर रखना, अतिरिक्त गर्मी और आयरन से बचना, और सही स्टोरेज अपनाना ये छोटे कदम साड़ियों की उम्र कई साल बढ़ा सकते हैं। इस तरह न केवल साड़ी की खूबसूरती बनी रहती है, बल्कि परिवार की यादों और परंपराओं को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।