डांसर और कोरियोग्राफर संदीप सोपारकर इन दिनों शो ‘शिव शक्ति: एक दिव्य प्रेम कथा’ में भगवान शिव का किरदार निभा रहे हैं। उनके लिए यह भूमिका सिर्फ एक पूजनीय पौराणिक चरित्र की बाहरी छवि को पर्दे पर उतारने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए शिव के दर्शन, उनकी भावनाओं, शारीरिक अभिव्यक्ति और जिम्मेदारी को समझना भी जरूरी है। संदीप का मानना है कि इस किरदार को प्रभावशाली बनाने के लिए उसके आंतरिक भावों को समझना बेहद अहम है।
भगवान शिव के किरदार को समझने के लिए संदीप कर रहे हैं खास तैयारी
अपने किरदार की तैयारी के बारे में बात करते हुए संदीप सोपारकर ने बताया कि रिहर्सल के दौरान कुछ ऐसे पल आते हैं, जब वह किरदार को बाहर से देखने के बजाय उस दृश्य को भीतर से महसूस करने लगते हैं। उनके मुताबिक, एक अभिनेता के लिए ऐसे पल बेहद खास होते हैं।
संदीप ने कहा कि जब वह भगवान शिव की दुनिया में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें इस किरदार से जुड़ी शांति, शक्ति और विशाल जिम्मेदारी का एहसास होता है। उनके लिए शिव का किरदार निभाना केवल अभिनय नहीं, बल्कि उनके गुणों और विचारों को समझने की एक प्रक्रिया भी है।
‘शिव सिर्फ त्रिशूल और जटाओं तक सीमित नहीं हैं’
संदीप सोपारकर का मानना है कि भगवान शिव की पहचान केवल उनकी पारंपरिक छवि तक सीमित नहीं है। त्रिशूल, जटाएं और तीसरी आंख उनके स्वरूप के प्रतीक जरूर हैं, लेकिन उनके पीछे एक गहरा दार्शनिक संसार भी मौजूद है।
उन्होंने कहा कि वह खुद को बार-बार याद दिलाते हैं कि शिव केवल एक प्रतिष्ठित छवि नहीं हैं, बल्कि उनके स्वरूप और विचारों में गहराई है। इसी दर्शन को समझने की कोशिश उनके अभिनय का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
डांस की ट्रेनिंग से मिलती है किरदार निभाने में मदद
एक डांसर और कोरियोग्राफर होने के नाते संदीप को भगवान शिव के किरदार को शारीरिक रूप से प्रस्तुत करने में अपनी डांस ट्रेनिंग से काफी मदद मिलती है। उनका कहना है कि मूवमेंट हमेशा से भावनाओं को व्यक्त करने का उनका प्रमुख माध्यम रहा है।
भगवान शिव के तांडव की ऊर्जा हो या ध्यान की गहरी शांति, संदीप चाहते हैं कि उनकी शारीरिक गतिविधियां किरदार की आंतरिक अवस्था को भी व्यक्त करें। उनके अनुसार, केवल संवादों से ही नहीं, बल्कि शरीर की भाषा से भी चरित्र की भावनाएं दर्शकों तक पहुंचनी चाहिए।
रिहर्सल के दौरान वह शिव की शारीरिक अभिव्यक्ति के साथ-साथ उनके मौन, नजरों और दूसरे किरदारों के प्रति उनकी प्रतिक्रियाओं पर भी ध्यान देते हैं। वह चाहते हैं कि दर्शकों को भगवान शिव की ब्रह्मांडीय शक्ति के साथ उनका भावनात्मक और व्यक्तिगत पक्ष भी देखने को मिले।
‘भगवान शिव का किरदार निभाना बड़ी जिम्मेदारी है’
भारतीय संस्कृति में भगवान शिव के प्रति लोगों की गहरी आस्था को देखते हुए संदीप इस भूमिका को एक बड़ी जिम्मेदारी मानते हैं। उनका कहना है कि जब कोई अभिनेता ऐसे पूजनीय चरित्र को निभाता है, तो उसे एहसास होता है कि वह लाखों लोगों के लिए महत्वपूर्ण भावनाओं और मान्यताओं से जुड़ी भूमिका प्रस्तुत कर रहा है।
हालांकि, संदीप इस बात को भी स्पष्ट करते हैं कि कोई अभिनेता वास्तव में भगवान शिव नहीं बन सकता। उनके मुताबिक, एक कलाकार ईमानदारी, अनुशासन और अपने हुनर के प्रति समर्पण के साथ उनके गुणों को समझने और मंच पर प्रस्तुत करने की कोशिश कर सकता है।
उनके लिए इस किरदार की असली चुनौती यही है कि वह भगवान शिव के स्वरूप को सम्मान के साथ प्रस्तुत करते हुए उनके विचारों और भावनाओं को भी दर्शकों तक पहुंचा सकें।
पौराणिक कहानियों में आज के दर्शकों के लिए भी हैं कई संदेश
संदीप सोपारकर का मानना है कि पौराणिक थिएटर में दर्शकों की बढ़ती दिलचस्पी एक सकारात्मक संकेत है। इससे पता चलता है कि लोग ऐसे मनोरंजन को पसंद करते हैं, जिसमें दृश्य भव्यता के साथ विचार और गहराई भी हो।
उनके अनुसार, भारतीय पौराणिक कथाओं में महत्वाकांक्षा, त्याग, कर्तव्य, प्रेम, न्याय, साहस और अपने फैसलों के परिणामों जैसे विषयों को जगह मिलती है। ये कहानियां आज के दौर में भी प्रासंगिक हैं और इन्हें इस तरह प्रस्तुत किया जा सकता है कि इनकी सांस्कृतिक जड़ें बरकरार रहें।
संदीप चाहते हैं कि पौराणिक कहानियां दर्शकों का मनोरंजन करने के साथ उन्हें सोचने का अवसर भी दें। भगवान शिव के किरदार के जरिए वह उनकी शक्ति, शांति, दर्शन और भावनात्मक पक्ष को सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं।