बॉलीवुड में सर्वाइवल थ्रिलर जॉनर की फिल्में कम ही बनती हैं, ऐसे में डायरेक्टर बिजॉय नांबियार की फिल्म ‘तू या मैं’ को लेकर दर्शकों में खास उत्साह था। आदर्श गौरव और शनाया कपूर स्टारर यह फिल्म रोमांस, ड्रामा और थ्रिल का ऐसा मिश्रण पेश करती है, जो खासकर सेकेंड हाफ में दर्शकों की सांसें थाम देता है। 2 घंटे 30 मिनट लंबी यह फिल्म मॉडर्न लव स्टोरी को सर्वाइवल ड्रामा में बदलते हुए एक अलग अनुभव देती है।
कहानी दो अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि से आने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की है। अवनी शाह (शनाया कपूर), जो ‘मिस वैनिटी’ के नाम से मशहूर है, एक रईस परिवार से ताल्लुक रखती है और सोशल मीडिया पर उसके लाखों फॉलोअर्स हैं। दूसरी ओर मारुति कदम उर्फ ‘आला फ्लोपारा’ (आदर्श गौरव) नालासोपारा की चॉल में रहने वाला एक संघर्षशील रैपर और कंटेंट क्रिएटर है, जो अपने हुनर के दम पर पहचान बनाना चाहता है। अलग दुनिया से आने के बावजूद दोनों की मुलाकातें बढ़ती हैं और प्यार परवान चढ़ता है। लेकिन अमीर-गरीब की खाई और पारिवारिक असहमति उनके रिश्ते के सामने दीवार बनकर खड़ी हो जाती है।
कहानी में असली मोड़ तब आता है जब दोनों गोवा घूमने निकलते हैं और किस्मत उन्हें कोंकण के एक सुनसान इलाके में 20 फीट गहरे खाली स्विमिंग पूल में फंसा देती है। वहां उनके साथ है एक मगरमच्छ। इसके बाद फिल्म पूरी तरह सर्वाइवल थ्रिलर में बदल जाती है। जान बचाने की जद्दोजहद और अनिश्चित हालात फिल्म को रोमांचक बना देते हैं।
‘तू या मैं’ दरअसल थाई फिल्म ‘द पूल’ का देसी रूपांतरण है, जिसे राइटर हिमांशु शर्मा ने मुंबई के परिवेश में ढाला है। फिल्म का पहला हिस्सा जहां रोमांस और इन्फ्लुएंसर कल्चर की दुनिया दिखाता है, वहीं दूसरा हिस्सा सस्पेंस और टेंशन से भरपूर है। हालांकि, रोमांस से थ्रिलर में बदलाव कुछ जगहों पर थोड़ा अचानक लगता है और शुरुआती प्रेम कहानी थोड़ा लंबी खिंचती महसूस होती है। कुछ लॉजिकल कमियां भी नजर आती हैं, लेकिन वे फिल्म के प्रभाव को पूरी तरह कम नहीं करतीं।
अभिनय की बात करें तो आदर्श गौरव ने संघर्षशील रैपर के किरदार में शानदार काम किया है। उनका मुंबईया अंदाज प्रभावी है। शनाया कपूर भी ‘मिस वैनिटी’ के रोल में जंचती हैं और स्क्रीन पर आत्मविश्वास के साथ नजर आती हैं। अंश विकास चोपड़ा ने सहायक भूमिका में मनोरंजन किया है, जबकि पारुल गुलाटी का काम संतोषजनक है।
टेक्निकल पक्ष फिल्म की बड़ी ताकत है। रेमी दलाई की सिनेमैटोग्राफी तूफानी माहौल और खौफ को बखूबी उभारती है। वीएफएक्स और एनिमेट्रॉनिक्स के जरिए रचा गया मगरमच्छ विश्वसनीय लगता है। प्रतीक राजगोपाल का बैकग्राउंड म्यूजिक सस्पेंस को मजबूत बनाता है। वहीं ‘जी लिया’, ‘आंखें चार’ और ‘तुम ही हमारी हो मंजिल माय लव’ जैसे गाने भी फिल्म को भावनात्मक रंग देते हैं।
‘तू या मैं’ रोमांस और सर्वाइवल का दिलचस्प मेल है, जो मनोरंजन की कसौटी पर खरी उतरती है और एक बार जरूर देखी जा सकती है।