डिजिटल पेमेंट ने रोजमर्रा के लेन-देन को काफी आसान और तेज बना दिया है, लेकिन इसके साथ लोगों के खर्च करने के तरीके में भी बदलाव आया है। एक्ट्रेस और राइटर गुलफाम खान हुसैन, जिन्हें Naamkarann, Aladdin – Naam Toh Suna Hoga, Dhruv Tara – Samay Sadi Se Pare, Gehna – Zewar Ya Zanjeer, India Calling और Ghar Ki Lakshmi Betiyann जैसे शोज के लिए जाना जाता है, UPI और क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल को लेकर थोड़ी सावधानी बरतती हैं।
गुलफाम का कहना है कि डिजिटल पेमेंट में पैसे खर्च होने का एहसास उतना नहीं होता, जितना कैश से भुगतान करने पर होता है। उन्होंने कहा, “मैं व्यक्तिगत तौर पर UPI या क्रेडिट कार्ड की बहुत बड़ी फैन नहीं रही हूं, क्योंकि इसमें पैसे हाथ से जाने का एहसास नहीं होता। जब आप कैश में पेमेंट करते हैं तो आपको साफ दिखाई देता है कि आप कितना खर्च कर रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि डिजिटल पेमेंट की आसानी कई बार खर्च को लगभग बिना किसी रुकावट के कर देती है, जिससे लोगों के ज्यादा खर्च करने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि, डिजिटल पेमेंट से पूरी तरह दूर रहना अब आसान नहीं है। गुलफाम ने बताया कि वह खुद भी डिजिटल ट्रांजैक्शन करती हैं, लेकिन उन्होंने अपने खर्च की एक लिमिट तय कर रखी है।
गुलफाम ने कहा, “अब सब कुछ डिजिटल हो गया है, इसलिए मैं भी डिजिटल ट्रांजैक्शन करती हूं। लेकिन मैंने consciously अपने खर्च की एक सीमा तय की है। मुझे लगता है कि हर व्यक्ति अपने लिए ऐसा कर सकता है। सुविधा अच्छी है, लेकिन आपको यह भी पता होना चाहिए कि आपका पैसा कहां जा रहा है।”
प्रस्तावित 0.4 फीसदी Merchant Discount Rate (MDR) पर अपनी राय रखते हुए गुलफाम ने कहा कि किसी एक ट्रांजैक्शन में यह राशि आम ग्राहक को बहुत बड़ी नहीं लग सकती। उनके मुताबिक, जब तक लेन-देन की रकम काफी बड़ी न हो, तब तक 0.4 फीसदी का अंतर किसी व्यक्ति को ज्यादा महसूस नहीं हो सकता, खासकर तब जब इसका सीधा असर ग्राहक की जेब पर न पड़े।
इसके साथ ही गुलफाम ने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने की लागत पर भी बात की। उनका कहना है कि टेक्नोलॉजी को तैयार करने, सिस्टम को मेंटेन करने, सिक्योरिटी बेहतर करने और नई तकनीक विकसित करने में काफी निवेश होता है।
गुलफाम ने कहा कि अगर छोटा-सा योगदान डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत बनाने, उसे सुरक्षित करने और इनोवेशन को बढ़ावा देने में मदद करता है, तो वह इसे पूरी तरह गलत नहीं मानतीं। उन्होंने यह भी कहा कि हर चीज के लिए सरकार से फंडिंग की उम्मीद नहीं की जा सकती और डिजिटलाइजेशन को मजबूत बनाने के लिए पूरे इकोसिस्टम की ओर से भी निवेश की जरूरत है।
गुलफाम के मुताबिक, डिजिटल पेमेंट के दौर में जरूरी है कि सुविधा, जिम्मेदारी से खर्च करने और मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के बीच सही बैलेंस बनाया जाए।