बॉलीवुड म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वाले कंपोजर शाश्वत सचदेव इन दिनों फिल्म धुरंधर के म्यूजिक को लेकर चर्चा में हैं। फिल्म के गानों ने दर्शकों के बीच काफी लोकप्रियता हासिल की है। खासतौर पर फिल्म का क्लाइमेक्स सॉन्ग फिर से लोगों के दिलों को छू गया। अब शाश्वत ने इस गाने के बनने के पीछे की एक भावुक कहानी शेयर की है।
हाल ही में शाश्वत सचदेव ने शेखर सुमन के टॉक शो ‘शेखर टुनाइट’ में अपनी म्यूजिक जर्नी और फिल्म ‘धुरंधर’ से जुड़े कई अनुभवों के बारे में बात की। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि इस गाने को कंपोज करते समय वह बेहद भावुक हो गए थे। उन्होंने बताया कि ‘फिर से’ सिर्फ एक गाना नहीं था, बल्कि उनके लिए एक खास एहसास और सफर था।
शाश्वत ने बताया कि कई बार संगीत बनाते समय कलाकार अपने अंदर की भावनाओं से जुड़ जाता है। ‘फिर से’ के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। इस गाने को तैयार करते समय वह इतने इमोशनल हो गए थे कि उनकी आंखों से आंसू निकल आए। इसके बाद उन्होंने मंदिर जाकर शांति महसूस की और खुद को दोबारा तैयार किया।
‘फिर से’ गाने के पीछे छिपी इमोशनल कहानी
फिल्म ‘धुरंधर’ का गाना ‘फिर से’ रिलीज के बाद लोगों के बीच काफी पसंद किया गया। इसकी धुन, बोल और भावनाओं ने दर्शकों पर गहरा असर डाला। शाश्वत सचदेव ने बताया कि इस गाने को बनाना उनके लिए एक सामान्य म्यूजिक प्रोजेक्ट जैसा नहीं था।
उन्होंने कहा कि गाना बनाते समय वह किरदारों और कहानी की भावनाओं से पूरी तरह जुड़ गए थे। यही वजह थी कि कंपोजिंग के दौरान वह काफी भावुक हो गए। कई बार किसी कहानी को संगीत के जरिए दिखाना आसान नहीं होता, लेकिन जब कलाकार खुद उस भावना को महसूस करता है तो उसका असर गाने में भी दिखाई देता है।
‘फिर से’ की खास बात यह रही कि इसमें सिर्फ म्यूजिक नहीं बल्कि एक गहरी भावना भी जुड़ी हुई थी। यही कारण है कि दर्शकों ने इस गाने को काफी पसंद किया। शाश्वत के अनुसार, इस गाने के पीछे काफी मेहनत और भावनात्मक जुड़ाव था।
उन्होंने बताया कि उस समय उन्हें खुद को संभालने के लिए मंदिर जाना पड़ा। उनके लिए यह पल काफी खास था क्योंकि संगीत बनाते समय वह कहानी और किरदारों की दुनिया में पूरी तरह खो गए थे।
‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ के लिए पहले तैयार नहीं थे शाश्वत
बातचीत के दौरान शाश्वत सचदेव ने अपनी पहली बड़ी फिल्म ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा भी शेयर किया। उन्होंने बताया कि शुरुआत में वह इस फिल्म का म्यूजिक बनाने को लेकर थोड़े हिचकिचा रहे थे। शाश्वत ने बताया कि फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर उनके काफी करीबी हैं और दोनों के बीच अच्छा रिश्ता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने आदित्य से कहा था कि इस फिल्म के लिए किसी बड़े और अच्छे म्यूजिक कंपोजर को लेना चाहिए। उन्हें डर था कि कहीं फिल्म के साथ कोई गलती न हो जाए।
उन्होंने अपनी सोच बताते हुए कहा कि यह फिल्म उनके लिए भी खास थी, क्योंकि आदित्य धर और उनकी किस्मत एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी। इसी वजह से वह चाहते थे कि फिल्म का संगीत बिल्कुल सही तरीके से बने।
हालांकि बाद में उन्होंने इस प्रोजेक्ट पर काम किया और फिल्म का म्यूजिक लोगों को काफी पसंद आया। ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ की सफलता के बाद शाश्वत सचदेव की पहचान इंडस्ट्री में और मजबूत हुई।
फिल्म ‘धुरंधर’ के म्यूजिक ने बॉलीवुड में एक अलग जगह बनाई है। शाश्वत सचदेव ने फिल्म के लिए ऐसे गाने तैयार किए, जिनमें नई सोच और अलग तरह की धुन देखने को मिली। यही वजह है कि फिल्म के गाने रिलीज होते ही दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बन गए। शाश्वत का मानना है कि किसी भी गाने को खास बनाने के लिए सिर्फ अच्छी धुन काफी नहीं होती, बल्कि उसके पीछे भावना और कहानी का जुड़ाव भी जरूरी होता है। ‘धुरंधर’ के म्यूजिक में यही चीज देखने को मिली।
फिल्म की सफलता के साथ-साथ इसके गानों ने भी दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई। ‘फिर से’ जैसे गाने ने साबित कर दिया कि जब संगीत में सच्ची भावनाएं जुड़ती हैं तो वह सीधे लोगों के दिल तक पहुंचता है।
शाश्वत सचदेव की यह कहानी बताती है कि एक अच्छा संगीतकार सिर्फ धुन नहीं बनाता, बल्कि अपनी भावनाओं और अनुभवों को भी उसमें शामिल करता है। यही वजह है कि ‘फिर से’ आज सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि एक यादगार अनुभव बन चुका है।