सेलिब्रिटी एस्ट्रोलॉजर और टैरो कार्ड रीडर Munisha Khatwani के लिए नवरात्रि सिर्फ पूजा-पाठ और त्योहार मनाने का मौका नहीं है, बल्कि यह अच्छे कर्म करने, अपनी आस्था से जुड़े रहने और एक सादा व सकारात्मक जीवन जीने की सीख भी देता है। उनके मुताबिक, नवरात्रि का असली संदेश बुराई पर अच्छाई की जीत के साथ-साथ अपने विचारों और कर्मों पर नियंत्रण रखना भी है।
आज के समय में बुराई पर अच्छाई की जीत का क्या मतलब है, इस सवाल पर Munisha ने कहा कि नवरात्रि का अर्थ अच्छे कर्मों को बुरे कर्मों से ऊपर रखना है। उनका मानना है कि जिंदगी में कई ऐसी चीजें होती हैं, जो हमें गलत रास्ते पर जाने के लिए प्रेरित करती हैं, लेकिन सही काम करने और अपने कर्मों को बेहतर रखने से ही असली जीत हासिल होती है।
उन्होंने कहा, “आज के समय में नवरात्रि का मतलब जाहिर तौर पर बुरे कर्मों के बजाय अच्छे कर्म करना है। हमारे सामने कई चीजें ऐसी होती हैं, जो हमें अपनी ओर आकर्षित करती हैं, लेकिन अगर हम सही कर्म और अच्छे काम करते हैं, तो निश्चित रूप से बुराई पर अच्छाई की जीत होगी।”
Munisha के मुताबिक, जिंदगी की सबसे बड़ी जीत अपने मन और कामों को नियंत्रित करना है। उनका मानना है कि जब इंसान अपने विचारों और व्यवहार पर ध्यान देने लगता है, तो वह खुद को बेहतर बना सकता है।
विदेश में बीता बचपन, गरबा की यादें आज भी खास
नवरात्रि से जुड़ी अपनी बचपन की यादों के बारे में बात करते हुए Munisha ने बताया कि उनका काफी बचपन विदेश में बीता है। इसी वजह से उन्हें नवरात्रि से जुड़ी बहुत ज्यादा पुरानी यादें नहीं हैं। हालांकि, गरबा और उसके दौरान होने वाली मस्ती उनके बचपन का खास हिस्सा रही है।
उन्होंने कहा, “मेरा ज्यादातर बचपन विदेश में बीता है, इसलिए नवरात्रि से जुड़ी मेरी बहुत गहरी यादें नहीं हैं। लेकिन गरबा करना और उस पूरे माहौल का अनुभव करना मेरे बचपन की यादों का हिस्सा रहा है।”
अगली पीढ़ी को देना चाहती हैं देवी पूजा का संदेश
Munisha Khatwani का मानना है कि त्योहारों को मनाते समय उनकी असली भावना और उद्देश्य को नहीं भूलना चाहिए। वह चाहती हैं कि अगली पीढ़ी भी नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की साधना, पूजा और सम्मान को प्राथमिकता दे।
उन्होंने कहा, “मैं अगली पीढ़ी को यही सिखाना चाहूंगी कि त्योहार का आनंद लेते हुए उसके मुख्य उद्देश्य को न भूलें। इन नौ दिनों में देवी साधना करना, देवी की पूजा करना और उनका सम्मान करना बेहद जरूरी है।”
खान-पान और जीवनशैली को लेकर भी Munisha ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के दौरान शाकाहारी भोजन अपनाने की कोशिश करनी चाहिए। अगर कोई ऐसा नहीं कर सकता, तो कम से कम शराब और दूसरी नशीली चीजों से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए। उनके अनुसार, शाकाहारी भोजन और नशे से दूरी जीवनशैली को बेहतर बनाने की दिशा में अच्छे कदम हो सकते हैं।
उन्होंने इस दौरान नियमित प्रार्थना करने पर भी जोर दिया और कहा कि त्योहार की व्यस्तता के बीच पूजा-पाठ को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
व्यस्त शेड्यूल के बीच ऐसे मनाती हैं नवरात्रि
अपने व्यस्त कामकाजी शेड्यूल के बावजूद Munisha Khatwani नवरात्रि को अपने तरीके से मनाने की कोशिश करती हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें माता की चौकी में शामिल होना पसंद है। अगर किसी वजह से वह वहां नहीं जा पाती हैं, तो अपने घर में नौ दिनों तक अखंड ज्योत जलाती हैं।
उन्होंने कहा, “नवरात्रि मेरे लिए बहुत मायने रखती है। ऐसा कोई खास नियम नहीं है, लेकिन मुझे माता की चौकी में जाना पसंद है। अगर किसी वजह से मैं वहां नहीं जा पाती, तो अपने घर में नौ दिनों तक 24 घंटे अखंड ज्योत जलाती हूं। दशहरा भी भगवान राम से जुड़ा मेरा पसंदीदा त्योहार है।”
‘अच्छाई की जीत हमेशा होती है’
Munisha के मुताबिक, नवरात्रि से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख यह है कि आखिरकार अच्छाई की जीत होती है। उनका मानना है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना इंसान को शक्ति देती है और अच्छे कर्मों का महत्व हमेशा बना रहता है।
उन्होंने कहा, “नवरात्रि की एक सीख हमें हमेशा याद रखनी चाहिए कि आखिरकार अच्छाई की बुराई पर जीत होती है। प्रार्थनाएं हमेशा काम करती हैं और मुझे लगता है कि ब्रह्मांड भी बुराई के मुकाबले अच्छाई का बेहतर जवाब देता है।”
अपनी बात खत्म करते हुए Munisha ने ईमानदारी, देवी की प्रार्थना और सादा जीवन जीने को नवरात्रि का मुख्य संदेश बताया। उन्होंने कहा कि इंसान को ऐसा जीवन जीने की कोशिश करनी चाहिए, जो उसके शरीर और मन दोनों के लिए अच्छा हो और जिसमें किसी तरह की नकारात्मकता न हो।
उनके मुताबिक, नवरात्रि सिर्फ नौ दिनों का त्योहार नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने, अपने कर्मों पर ध्यान देने और आस्था के साथ जीवन जीने की प्रेरणा भी है।