हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ओ रोमियो को दर्शकों से मिल रहे रिस्पॉन्स के बीच अभिनेता शाहिद कपूर ने सोशल मीडिया ट्रोलिंग को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कलाकारों के लिए ट्रोलिंग से निपटना आसान नहीं होता, लेकिन खुद को समझना और भीतर से मजबूत रहना सबसे जरूरी है।
फिल्म के प्रमोशन के दौरान दिए गए इंटरव्यू में शाहिद ने कहा कि अक्सर लोग यह दावा करते हैं कि ट्रोलिंग का उन पर कोई असर नहीं पड़ता, लेकिन ऐसा कहना पूरी तरह सही नहीं है। उनके मुताबिक, हर इंसान पर किसी न किसी स्तर पर बाहरी प्रतिक्रियाओं का असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि जरूरी यह है कि व्यक्ति खुद से ईमानदार रहे और यह समझे कि वह किसी स्थिति के बारे में वास्तव में कैसा महसूस करता है।
ट्रोलिंग और वैलिडेशन पर शाहिद की सोच
शाहिद कपूर ने साफ कहा कि किसी भी कलाकार को सिर्फ बाहरी तारीफ या आलोचना के भरोसे नहीं जीना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्ममूल्य का एहसास भीतर से आना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि दर्शकों की राय को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि कलाकार और दर्शकों के बीच जुड़ाव भी उतना ही जरूरी है।
उनका कहना था कि संतुलन बनाना ही असली चुनौती है एक तरफ लोगों की राय को सुनना और दूसरी तरफ खुद की पहचान और आत्मविश्वास को बनाए रखना।
“बोलने से पहले अपनी औकात समझो”
इंटरव्यू के दौरान शाहिद ने समाज में बढ़ती बेबाकी और सोशल मीडिया के माहौल पर भी टिप्पणी की। एक्टर शाहिद कपूर ने आगे कहा ‘लेकिन यह बहुत जरूरी है, आप जानते हैं, मैं हमेशा यह कहता हूं और मैं हमेशा कहता रहूंगा, चाहे लोग मुझे बोले कि, पता नहीं पुराना जमाना या जो भी हो, कि आपके बोलने की औकात होनी चाहिए ना, तभी मुंह खोलना चाहिए. यह मैंने बचपन में सीखा था, जब मैं मेरे पापा, मम्मी… मैंने बचपन में बहुत कुछ देखा है, मैंने बड़े कलाकारों को देखा है, आप जानते हैं, लोग मुंह नहीं खोलते थे उनके सामने. आज कल लोगों को बहुत बोलने की आदत हो गई है. खुद पहले देख लो आप कितने पानी में हो, फिर बात करो. यह सोशल ट्रेंड है और यह क्या है ना, आप नकारात्मक नहीं हो सकते, जब तक कि आप असुरक्षित या डरे हुए या दुखी न हों,
उन्होंने कहा कि आजकल लोग बिना सोचे-समझे कुछ भी कह देते हैं, जबकि बोलने से पहले अपनी सीमाओं और समझ का एहसास होना चाहिए। उनके मुताबिक, यह सीख उन्हें बचपन से मिली है कि हर बात कहने से पहले खुद का आकलन करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि पहले लोग वरिष्ठों और अनुभवी लोगों के सामने सोच-समझकर बात करते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया ने हर किसी को तुरंत प्रतिक्रिया देने की आदत डाल दी है।
नकारात्मकता क्यों फैलती है?
शाहिद ने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ‘तो अगर इतनी नेगेटिविटी बाहर आ रही है, मेरा मतलब है कि यह सच में दिखाता है कि उन लोगों की अंदर की दुनिया कितनी दुखी है. इसलिए आपको खुद को अच्छा और खुश रखना होगा और परफॉर्म करने के लिए तैयार रहना होगा. यह सबसे जरूरी है, आप जानते हैं खुद को पूरी तरह से पॉजिटिविटी से भरें. बुराई को ऐसे लें जैसे आप जानते हैं कि आपकी ठुड्डी पर अच्छी चोट लगती है और एक अच्छा फाइटर जानता है कि फिर से कैसे खड़ा होना है. ऐसा करें, लेकिन हमेशा खुद का साथ दो यार. तुम्हे खुद का साथ देना होगा’
शाहिद कपूर का मानना है कि जब लोग बहुत ज्यादा नकारात्मक बातें करते हैं, तो अक्सर यह उनके भीतर की असुरक्षा या दुख को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि अगर कोई लगातार कटु टिप्पणी कर रहा है, तो यह उसकी मानसिक स्थिति के बारे में भी बहुत कुछ बताता है।

उन्होंने सलाह दी कि कलाकारों और आम लोगों दोनों को खुद को सकारात्मक बनाए रखना चाहिए और नकारात्मकता को व्यक्तिगत रूप से लेने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
मजबूत बने रहने का संदेश
शाहिद ने कहा कि जीवन में आलोचना और चुनौतियां आती रहेंगी, लेकिन जरूरी यह है कि व्यक्ति गिरने के बाद फिर से खड़ा होना सीखे। उन्होंने इसे एक फाइटर की मानसिकता बताया चोट लगती है, लेकिन आगे बढ़ना नहीं छोड़ना चाहिए। उनके अनुसार, सबसे महत्वपूर्ण बात है खुद का साथ देना और खुद पर भरोसा बनाए रखना।
फैंस के लिए प्रेरणादायक संदेश
इंटरव्यू के अंत में शाहिद कपूर ने यह संदेश दिया कि खुशी और संतुलन भीतर से आता है। उन्होंने कहा कि अगर व्यक्ति खुद को सकारात्मक रखे और अपने काम पर ध्यान दे, तो बाहरी शोर से प्रभावित हुए बिना आगे बढ़ सकता है।
शाहिद का यह बेबाक अंदाज फैंस के बीच खूब चर्चा में है और सोशल मीडिया पर उनके बयान को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।