बिहार की युवा विधायक मैथिली ठाकुर एक बार फिर अपने सादगी भरे और देसी अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। पारंपरिक पहनावे के लिए पहचानी जाने वाली मैथिली ने हाल ही में केरल की मशहूर कासवु साड़ी पहनकर अपनी तस्वीरें साझा कीं, जिन्होंने फैशन और लाइफस्टाइल जगत में खास ध्यान खींचा है। कम उम्र में सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हुए उन्होंने जिस तरह से भारतीय परंपरा को अपने स्टाइल का हिस्सा बनाया है, वह कई लोगों के लिए प्रेरणादायक बन रहा है।
सादगी में दिखा शाही अंदाज
मैथिली ठाकुर का साड़ी लुक हमेशा ही सादगी और गरिमा से भरा होता है, लेकिन इस बार केरल की पारंपरिक सफेद कासवु साड़ी में उनका अंदाज खास तौर पर आकर्षक नजर आया। उन्होंने साड़ी को चौड़ी प्लीट्स वाले पल्लू के साथ क्लासिक तरीके से ड्रेप किया, जिससे उनका लुक बेहद संतुलित और एलिगेंट लगा। साड़ी पर नीले और सुनहरे धागों से बने कमल के फूल की बूटियां इसकी खूबसूरती को और निखार रही थीं।
कासवु साड़ी का पारंपरिक महत्व
कासवु साड़ी केरल की पहचान मानी जाती है और इसे खास अवसरों जैसे शादी, त्योहार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में पहना जाता है। इसका सुनहरा बॉर्डर समृद्धि और शुभता का प्रतीक होता है। मैथिली की साड़ी में भी पारंपरिक सुनहरे किनारे के साथ नीली पट्टी का खूबसूरत मेल देखने को मिला, जिसने पूरे लुक में रिचनेस जोड़ दी।

सिंपल ब्लाउज ने बढ़ाई ग्रेस
मैथिली ने साड़ी के साथ बेहद साधारण ब्लाउज चुना, जिसमें राउंड नेकलाइन और हाफ स्लीव्स थीं। ब्लाउज का बॉर्डर साड़ी से मैच करता था, लेकिन उस पर कोई अतिरिक्त डिजाइन नहीं था। यह सादगी उनके पूरे लुक को संतुलित और क्लासी बना रही थी।
जूलरी में क्लासिक टच
जूलरी के मामले में भी मैथिली ने मिनिमल लेकिन प्रभावशाली विकल्प चुना। उन्होंने पर्ल और गोल्ड का लेयर्ड नेकपीस पहना, जिसमें गोल्ड पेंडेंट और छोटे मोती लगे थे। इसके साथ सोने के झुमके, लाल बिंदी और हाफ पिनअप हेयरस्टाइल ने उनके पारंपरिक लुक को और निखार दिया। उनका यह संयमित स्टाइल बताता है कि कम एक्सेसरीज में भी शानदार लुक हासिल किया जा सकता है।
कासवु साड़ी कैसे बनती है
पारंपरिक कासवु साड़ी में सोने की जरी का उपयोग किया जाता है। महीन धागों पर सोने की परत लपेटकर बॉर्डर बुना जाता है, जिससे साड़ी की कीमत काफी बढ़ जाती है। हालांकि आजकल बाजार में सुनहरे धागों और अन्य सजावटी तत्वों से बनी किफायती कासवु साड़ियां भी उपलब्ध हैं। समय के साथ इस साड़ी पर कढ़ाई और नए डिजाइन भी देखने को मिल रहे हैं।
असली और नकली की पहचान
विशेषज्ञों के अनुसार, असली कासवु साड़ी की जरी में सोना या चांदी मिश्रित धागे होते हैं, जिनकी चमक सॉफ्ट और संतुलित होती है। इसका कपड़ा हल्का, मुलायम और स्मूद कॉटन का होता है। वहीं नकली साड़ी की चमक अधिक तेज और कपड़ा अपेक्षाकृत सख्त महसूस होता है। बॉर्डर की बुनाई भी असली साड़ी में अधिक साफ और बारीक होती है।
फैशन के साथ सांस्कृतिक संदेश
मैथिली ठाकुर का यह लुक सिर्फ फैशन स्टेटमेंट नहीं, बल्कि भारतीय पारंपरिक परिधानों के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है। वह दिखाती हैं कि आधुनिक सार्वजनिक जीवन में रहते हुए भी अपनी जड़ों से जुड़े रहना संभव है।
उनका यह कासवु साड़ी लुक उन महिलाओं के लिए बेहतरीन प्रेरणा है जो सादगी के साथ क्लासिक और एलीगेंट स्टाइल अपनाना चाहती हैं।