टीवी और डिजिटल स्पेस में काम कर चुके अभिनेता Amal Sehrawat का मानना है कि Artificial Intelligence (AI) और deepfake technology के बढ़ते इस्तेमाल के बीच consent और digital identity को लेकर बातचीत पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गई है। Choti Sarrdaarni में Jagga और Yeh Rishta Kya Kehlata Hai में Sangram Singh का किरदार निभा चुके Amal ने Vikram Bhatt की Untouchables, Habib Faisal की Home और Apoorva Lakhia की Crackdown जैसे digital projects में भी काम किया है।
Deepfake को लेकर क्यों चिंतित हैं Amal Sehrawat?
Deepfake technology को लेकर बात करते हुए Amal ने कहा कि तकनीक ने किसी व्यक्ति के चेहरे और आवाज को reproduce करना पहले के मुकाबले काफी आसान बना दिया है। उनके मुताबिक, एक अभिनेता का चेहरा, आवाज और expressions उसकी professional identity का हिस्सा होते हैं और अब इन्हीं चीजों का इस्तेमाल बिना जानकारी या सहमति के किया जा सकता है।
Amal का मानना है कि पहले किसी की तस्वीर या वीडियो को convincingly manipulate करने के लिए ज्यादा technical expertise की जरूरत होती थी, लेकिन AI ने यह प्रक्रिया काफी आसान कर दी है। यही वजह है कि deepfake का मुद्दा actors के लिए ज्यादा personal हो गया है।
‘Digital presence को लेकर ज्यादा conscious हूं’
अभिनेता के अनुसार, deepfake का असर celebrities और उनके audiences के बीच बने trust पर भी पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि actors कई सालों में अपनी आवाज, चेहरे और personality के जरिए दर्शकों के साथ एक रिश्ता बनाते हैं। अगर कोई technology उनकी शक्ल और आवाज का इस्तेमाल करके उन्हें ऐसी बात कहते या करते हुए दिखा दे, जो उन्होंने कभी नहीं की, तो इससे उस trust को नुकसान पहुंच सकता है।
हालांकि Amal का कहना है कि इस वजह से उन्हें अपनी बात रखने से डरना नहीं चाहिए। उनके मुताबिक, इसका जवाब fear नहीं बल्कि awareness है।
‘AI खुद समस्या नहीं है’
Amal Sehrawat AI को पूरी तरह नकारात्मक तकनीक नहीं मानते। उनका कहना है कि filmmaking, visual effects और storytelling में AI के जरिए कई नई संभावनाएं पैदा हो सकती हैं। असली चिंता तब शुरू होती है, जब technology consent की सीमा पार कर देती है।
उनके मुताबिक, अगर किसी actor की likeness को उसकी जानकारी और permission के साथ किसी creative project में इस्तेमाल किया जाता है, तो वह अलग बात है। लेकिन किसी के चेहरे और आवाज का इस्तेमाल बिना पूछे करना पूरी तरह अलग मामला है।
AI Deepfake में सबसे बड़ा फर्क है realism
Amal का मानना है कि celebrities ने पहले भी edited photographs और statements को context से बाहर किए जाने जैसी परेशानियों का सामना किया है, लेकिन AI-generated content ज्यादा चिंता पैदा करता है क्योंकि यह काफी real दिखाई दे सकता है।
उनके मुताबिक, AI की मदद से किसी व्यक्ति को उसकी ही आवाज में ऐसी बात कहते हुए दिखाया जा सकता है, जो उसने कभी नहीं कही। एक actor के लिए यह खास तौर पर गंभीर मुद्दा है, क्योंकि उसका चेहरा और आवाज ही उसके professional tools हैं। इसलिए अब सिर्फ तस्वीर को सुरक्षित रखने की बात नहीं है, बल्कि पूरी digital identity और performance की सुरक्षा जरूरी है।
Creators, Platforms और Audience की भी जिम्मेदारी
Amal का मानना है कि manipulated content के viral होने पर इसकी जिम्मेदारी सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं हो सकती। Content creator, social media platforms और audience, सभी की अपनी भूमिका है।
उन्होंने कहा कि creator की पहली जिम्मेदारी है कि वह ऐसा content बनाए, जबकि platforms को reported manipulated content पर तेजी से action लेना चाहिए। वहीं audience को भी सिर्फ इसलिए किसी वीडियो को सच नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि वह देखने में convincing है।
‘वीडियो देखकर तुरंत विश्वास न करें’
Amal ने audiences से अपील की कि अगर किसी actor का कोई shocking video सामने आता है, तो उसे तुरंत सच मानकर share करने के बजाय उसके source को check करना चाहिए और credible confirmation तलाशनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि एक share भले ही छोटी चीज लगे, लेकिन जब लाखों लोग उसे share करते हैं, तो fabricated content भी लोगों को सच लगने लग सकता है। ऐसे में fake video की reach correction से कहीं ज्यादा तेज हो सकती है।
AI से filmmaking में नई संभावनाएं, लेकिन consent जरूरी
Amal AI के filmmaking में बढ़ते इस्तेमाल को लेकर उत्साहित भी हैं। उनका मानना है कि technology ने हमेशा cinema को बदला है और actors ने भी इन बदलावों के साथ खुद को adapt किया है। लेकिन technology का इस्तेमाल performance को enhance करने और किसी की identity को उसकी permission के बिना reproduce करने के बीच एक स्पष्ट सीमा होनी चाहिए।
Amal के लिए इस पूरी बहस का सबसे महत्वपूर्ण शब्द ‘consent’ है। उनका कहना है कि अगर actor इस बात के लिए सहमत है कि उसके face, voice या performance का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा, तो यह एक creative conversation है। लेकिन बिना जानकारी के ऐसा करना identity और ownership का मुद्दा बन जाता है।
उनके मुताबिक, AI को actors के लिए ज्यादा creative possibilities लेकर आना चाहिए, न कि उनसे अपनी ही likeness के इस्तेमाल का फैसला करने का अधिकार छीनना चाहिए।