लंबे समय बाद अभिनेत्री करिश्मा कपूर ने ओटीटी की दुनिया में वेब सीरीज ‘ब्राउन’ के जरिए वापसी की है। उनके फैंस को इस प्रोजेक्ट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन यह साइकोलॉजिकल क्राइम थ्रिलर दर्शकों की अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी उतरती नजर नहीं आती। शानदार कलाकारों, बेहतरीन लोकेशन और मजबूत प्रोडक्शन वैल्यू के बावजूद सीरीज अपनी बेहद धीमी रफ्तार और उलझी हुई कहानी के कारण प्रभाव छोड़ने में असफल रहती है।
सीरीज की कहानी कोलकाता में हुए एक हाई-प्रोफाइल मर्डर से शुरू होती है। शहर के एक प्रभावशाली व्यक्ति की बेटी की हत्या हो जाती है, जिसके बाद मामले की जांच के लिए पुलिस अधिकारी रीटा ब्राउन को जिम्मेदारी सौंपी जाती है। जांच आगे बढ़ती है तो कई संदिग्ध सामने आते हैं और फिर एक दूसरा मर्डर भी उसी पैटर्न पर होता है। सात एपिसोड की यह सीरीज इसी रहस्य को सुलझाने की कोशिश करती है कि आखिर इन हत्याओं के पीछे कौन है और उसका मकसद क्या है।
शुरुआत में ‘ब्राउन’ एक दिलचस्प क्राइम थ्रिलर का आभास देती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इसकी गति लगातार धीमी होती जाती है। सीरीज में लगभग हर किरदार किसी न किसी मानसिक, भावनात्मक या व्यक्तिगत संघर्ष से जूझता हुआ दिखाई देता है। यह ट्रॉमा और मनोवैज्ञानिक तनाव कहानी पर इतना हावी हो जाता है कि मुख्य रहस्य पीछे छूटने लगता है। नतीजा यह होता है कि दर्शकों की दिलचस्पी धीरे-धीरे कम होने लगती है।

मेकर्स ने इसे एक अलग और गहराई वाली साइकोलॉजिकल थ्रिलर बनाने की कोशिश की है, लेकिन कहानी को जरूरत से ज्यादा जटिल और खींचा हुआ बना दिया गया है। कई ऐसे दृश्य और सब-प्लॉट हैं जो कहानी की गति को और धीमा करते हैं। यहां तक कि जब रहस्य सामने आने लगता है, तब भी सीरीज लंबी चलती रहती है और विभिन्न किरदारों के व्यक्तिगत दर्द और संघर्षों पर फोकस करती रहती है।
अभिनय की बात करें तो करिश्मा कपूर ने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी और मजबूती के साथ निभाया है। एक जटिल और मानसिक दबाव से जूझ रही पुलिस अधिकारी के रूप में उनका प्रदर्शन प्रभावशाली है। हालांकि कमजोर लेखन और धीमी कहानी उनके अभिनय का पूरा फायदा नहीं उठा पाती। सूर्या शर्मा भी अपने रोल में प्रभावित करते हैं और स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी दमदार लगती है। वहीं जिशु सेनगुप्ता, सोनी राजदान, मेघना मलिक और हेलन जैसे कलाकारों ने भी अच्छा काम किया है, लेकिन कई प्रतिभाशाली कलाकारों को पर्याप्त स्क्रीन स्पेस नहीं मिल पाता।

निर्देशक अभिनय देव ने कोलकाता के माहौल और विजुअल टोन को प्रभावशाली तरीके से पेश किया है। तकनीकी रूप से सीरीज मजबूत दिखाई देती है, लेकिन कमजोर लेखन और धीमी पटकथा इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरती है।
कुल मिलाकर, ‘ब्राउन’ एक ऐसी सीरीज है जिसमें दमदार कलाकार और अच्छा निर्देशन होने के बावजूद कहानी और स्क्रीनप्ले दर्शकों को बांधने में नाकाम रहते हैं। अगर आप तेज रफ्तार क्राइम थ्रिलर पसंद करते हैं, तो यह सीरीज आपको निराश कर सकती है।