अक्षय कुमार और सैफ अली खान की फिल्म ‘हैवान’ सिनेमाघरों में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। प्रियदर्शन के निर्देशन में बनी इस क्राइम थ्रिलर को लेकर रिलीज से पहले काफी चर्चा थी। इसकी सबसे बड़ी वजह अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी थी, जो करीब 18 साल बाद बड़े पर्दे पर एक साथ नजर आई थी। इसके अलावा दिवंगत अभिनेता असरानी की यह आखिरी फिल्म भी है। हालांकि, दर्शकों और समीक्षकों से फिल्म को खास प्रतिक्रिया नहीं मिली और बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन निराशाजनक रहा।
करीब 130 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हैवान’ भारतीय बॉक्स ऑफिस पर महज 9.92 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर सकी। फिल्म अपनी लागत का 8 फीसदी हिस्सा भी नहीं वसूल पाई। अब सिनेमाघरों में असफल रहने के बाद यह फिल्म OTT प्लेटफॉर्म पर दस्तक देने के लिए तैयार है। ऐसे में जो दर्शक इसे थिएटर में नहीं देख पाए थे, उनके पास घर बैठे फिल्म देखने का मौका होगा।
Haiwaan OTT Release Date: कब और कहां देखें फिल्म?
KVN प्रोडक्शंस और थेस्पियन फिल्म्स के बैनर तले बनी ‘हैवान’ 6 नवंबर को OTT पर रिलीज होगी। फिल्म SonyLIV पर स्ट्रीम की जाएगी। दर्शक इस प्लेटफॉर्म पर अक्षय कुमार और सैफ अली खान की इस सस्पेंस से भरी कहानी का आनंद ले सकेंगे।
क्या है ‘हैवान’ की कहानी?
फिल्म में सैफ अली खान ने श्याम राणे का किरदार निभाया है, जो नेत्रहीन होने के बावजूद मार्शल आर्ट में माहिर है। वह मुंबई की एक पॉश सोसाइटी में मेंटेनेंस मैनेजर के तौर पर काम करता है। श्याम की देखने की क्षमता भले ही नहीं है, लेकिन उसकी सुनने और सूंघने की शक्ति काफी तेज है। वह एक नेकदिल इंसान है और अपनी बहन श्रद्धा की शादी के लिए पैसे जुटाने की कोशिश कर रहा है।
इसी सोसाइटी में रिटायर्ड जज प्रधान भी रहते हैं, जो श्याम को अपना भरोसेमंद दोस्त मानते हैं। हालांकि, जज प्रधान का अतीत एक ऐसे शख्स से जुड़ा है, जो अब उनसे बदला लेना चाहता है।
अक्षय कुमार बने खूंखार साइको किलर
अक्षय कुमार फिल्म में परशुराम गोखले के किरदार में हैं। कई साल पहले जस्टिस प्रधान ने उसे एक गंभीर अपराध के मामले में सजा सुनाई थी। परशुराम खुद को बेगुनाह बताता रहा, लेकिन अदालत में मिले सबूतों के आधार पर उसे जेल भेज दिया गया। इस दौरान उसके परिवार की एक दुखद घटना में मौत हो गई। जेल से बाहर आने के बाद वह अपनी बर्बाद जिंदगी का जिम्मेदार जस्टिस प्रधान को मानता है और उनसे बदला लेने की ठान लेता है।
कहानी में बड़ा मोड़ तब आता है, जब परशुराम जस्टिस प्रधान की हत्या कर देता है। इस दौरान श्याम वहां मौजूद होता है, लेकिन वह हमलावर को देख नहीं पाता। इसके बावजूद वह अपनी तेज इंद्रियों के सहारे कातिल तक पहुंचने की कोशिश करता है।
नंदिनी की सुरक्षा के लिए श्याम की जंग
फिल्म में नंदिनी नाम की एक छोटी बच्ची की एंट्री कहानी को और दिलचस्प बना देती है। जस्टिस प्रधान उसे अपनी बेटी की तरह मानते हैं और अब उसकी जिम्मेदारी श्याम के कंधों पर आ जाती है। परशुराम नंदिनी को भी निशाना बनाना चाहता है, जबकि श्याम उसकी रक्षा के लिए हर संभव कोशिश करता है।
दूसरी तरफ पुलिस इंस्पेक्टर वर्षा जोशी और इंस्पेक्टर शिंदे इस पूरे मामले की जांच में जुटे हैं। अब सवाल है कि क्या श्याम अपनी खास क्षमताओं और मार्शल आर्ट के दम पर नंदिनी को बचा पाएगा? फिल्म के क्लाइमेक्स में आने वाला बड़ा ट्विस्ट भी कहानी को एक नया मोड़ देता है।