तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी बीच प्रदेश भाजपा अध्यक्ष नयनार नागेंद्रन का एक बयान बड़ा विवाद बन गया, जिसमें उन्होंने अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम अभिनेता से नेता बने विजय पर निशाना साधते हुए ले लिया। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया हुई और आखिरकार भाजपा नेता को खेद व्यक्त करना पड़ा।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब विजय ने आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक दावेदारी मजबूत होने का दावा किया। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए नागेंद्रन ने कहा कि उन्हें विजय पर “दया आती है” क्योंकि उनके पास राजनीतिक अनुभव नहीं है। उन्होंने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि विजय को पहले तृषा के घर जाना चाहिए और उनके परिवार से अच्छे संबंध बनाने चाहिए। इस बयान को व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणी माना गया।
बयान सामने आने के बाद अभिनेत्री तृषा कृष्णन की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया दी गई। उनके कानूनी सलाहकार ने बयान जारी कर कहा कि तृषा को उम्मीद नहीं थी कि किसी बड़े राजनीतिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की अनुचित टिप्पणी की जाएगी। बयान में कहा गया कि अभिनेत्री अपने पेशे और काम के कारण जानी जाती हैं और उनका नाम उन मामलों में नहीं घसीटा जाना चाहिए जिनसे उनका कोई संबंध नहीं है। इस प्रतिक्रिया के बाद मामला और गरमा गया और सोशल मीडिया पर भी नागेंद्रन की आलोचना शुरू हो गई।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा तेजी से फैल गया। कई लोगों ने इसे महिलाओं के प्रति असम्मानजनक टिप्पणी बताया और सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार भाषा के इस्तेमाल की मांग की। पार्टी के अंदर भी इस बयान को लेकर असहजता महसूस की गई। इसके बाद भाजपा की महिला मोर्चा से जुड़ी नेताओं ने भी इस मामले पर चर्चा की।
लगातार बढ़ते विवाद के बाद नागेंद्रन ने सफाई देते हुए अपने बयान पर खेद जताया। उन्होंने कहा कि यदि उनके शब्दों से किसी को दुख पहुंचा है तो वे इसके लिए माफी मांगते हैं। उनके अनुसार यह टिप्पणी अनजाने में हुई और उनका किसी को आहत करने का इरादा नहीं था। उन्होंने बताया कि पार्टी की राष्ट्रीय महिला विंग प्रमुख वनथी श्रीनिवासन और प्रदेश के वरिष्ठ नेता के अन्नामलाई ने उनसे इस विषय पर बातचीत की है।
नागेंद्रन ने आगे कहा कि सार्वजनिक जीवन में शब्दों का चयन बहुत सावधानी से होना चाहिए और यदि उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे इसके लिए गहरी माफी मांगते हैं। उनके इस बयान के बाद मामला कुछ हद तक शांत हुआ, लेकिन राजनीतिक बहस जारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से पहले नेताओं की टिप्पणियां अक्सर राजनीतिक रणनीति का हिस्सा होती हैं, लेकिन निजी जीवन से जुड़े संदर्भ जोड़ने पर विवाद खड़ा हो जाता है। यह घटना भी इसी का उदाहरण बन गई, जहां राजनीतिक हमला व्यक्तिगत टिप्पणी में बदल गया और अंततः माफी तक बात पहुंची।