फिल्म ‘बोल बोल रानी’ के लिए तारीफ बटोर चुके अभिनेता संभाजी ससाणे के लिए उनकी बहनों के साथ रिश्ता सिर्फ भाई-बहन का नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की नींव है। संभाजी पांच सगी बहनों और पांच कजिन बहनों के साथ बड़े हुए। उनके घर में कभी सगी और कजिन बहन के बीच कोई फर्क नहीं किया गया। सभी एक ही परिवार का हिस्सा थीं और एक ही छत के नीचे साथ पली-बढ़ीं।
अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा करीब रहीं अपनी दिवंगत बहन मीरा ताई को याद करते हुए संभाजी ने बताया कि साल 2015 में उन्हें खोना उनकी जिंदगी के सबसे मुश्किल दौर में से एक था।
उन्होंने कहा, “मैं बहनों के बीच बड़ा हुआ हूं-पांच सगी और पांच कजिन बहनें। हम सभी एक ही परिवार की तरह एक छत के नीचे रहते थे। ऐसे घर में आप कभी अकेले नहीं होते, कभी बिना किसी की नजर के नहीं होते और कभी प्यार से दूर नहीं होते।”
मीरा ताई को याद करते हुए संभाजी ने बताया कि जब वह काफी छोटी उम्र में थीं और दो बच्चों की मां थीं, तब उन्हें brain-dead घोषित कर दिया गया था। उस समय संभाजी के लिए यह समझना बेहद मुश्किल था कि जो इंसान सांस ले रहा है, उसे दुनिया से जा चुका कैसे कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि मीरा ताई के जाने के बाद उनका घर पूरी तरह खामोश हो गया था और वह खुद भी लंबे समय तक इस सदमे से बाहर नहीं निकल पाए। उनके मुताबिक, उस घटना के बाद जिंदगी पहले जैसी नहीं रही।
हालांकि, आज भी मीरा ताई की यादें उनके चेहरे पर मुस्कान ले आती हैं। संभाजी ने बताया कि मीरा उन्हें circus लेकर जाती थीं, उनकी handwriting सुधारती थीं, उनके साथ डांस और गाने करती थीं और छोटी-छोटी चीजों को खास यादों में बदल देती थीं।
बचपन की सबसे खास यादों में से एक Rambo Circus जाना भी है। संभाजी ने बताया कि उनका पूरा परिवार एक साथ circus देखने गया था। उनके परिवार के लिए बाहर जाना कोई आम बात नहीं थी, बल्कि साल में कभी-कभार होने वाला एक बड़ा मौका था। उनकी बहन को कुछ free passes मिले थे और सभी ने मिलकर उस दिन को खास बना दिया।
संभाजी ने कहा, “हमारे पास बहुत कुछ नहीं था, इसलिए हमारी यादें ही हमारी सबसे बड़ी दौलत थीं और उस दिन की हर याद आज भी मेरे पास है।”
बचपन में संभाजी ने अपनी बहनों के अंदर जिम्मेदारी और धैर्य भी देखा। जब उनके माता-पिता काम की तलाश में घर से बाहर जाते थे, तब बच्चे एक-दूसरे का ख्याल रखते थे। उनकी बहनों ने छोटी उम्र में ही घर की जिम्मेदारियां संभाल ली थीं।
उन्होंने बताया कि उनकी बहनें खाना बनाती थीं, उन्हें खाने का सामान दिलाने ले जाती थीं और बचे हुए पैसों को आने वाले दिनों के लिए गुल्लक में जमा करती थीं।
संभाजी ने अपनी बहनों की ताकत को याद करते हुए कहा कि उन्होंने स्क्रीन पर कई मजबूत किरदार निभाए हैं, लेकिन उनके घर की रसोई में अपनी बहनों जैसी ताकत उन्होंने कभी नहीं देखी।
समय के साथ संभाजी और उनकी बहनों का रिश्ता और मजबूत हुआ है। आज भी उनकी बहनें लगातार उन्हें फोन करके पूछती हैं कि उन्होंने खाना खाया या नहीं, नींद पूरी हुई या नहीं और वह ठीक हैं या नहीं।
जब उनकी कोई फिल्म रिलीज होती है, तो बहनें उसे अपनी फिल्म की तरह celebrate करती हैं। वह अपने दोस्तों और परिवार के साथ थिएटर जाकर उनकी फिल्म देखती हैं।
संभाजी ने कहा कि वह अपनी बहनों से अपनी जिंदगी की कोई बात छिपाते नहीं हैं, क्योंकि वे उन्हें उस समय से जानती हैं जब वह कोई नहीं थे। यही वजह है कि उन्हें अपनी बहनों के प्यार पर पूरा भरोसा है।
बचपन की एक और खास याद बताते हुए उन्होंने कहा कि जब वह करीब आठ साल के थे, तब उनकी बहनों ने मिलकर उनके birthday पर एक cycle किराए पर ली थी। सभी बहनों ने अपनी छोटी-छोटी बचत जोड़कर उनके लिए पूरे दिन के लिए bicycle rent की और उन्हें चलाना सिखाया।
संभाजी ने कहा कि उनकी बहनें पूरे दिन उन्हें cycle चलाना सिखाती रहीं-गिरने पर उठातीं, संभालतीं और फिर कोशिश करने के लिए कहतीं। वह cycle उन्हें हमेशा के लिए नहीं दे सकीं, लेकिन उन्होंने उन्हें उस cycle पर बिताया हुआ पूरा दिन और उसे चलाना सिखाने की याद दी।
संभाजी के मुताबिक, उनकी बहनों ने उन्हें सबसे बड़ा सबक धैर्य का सिखाया। बचपन में जब मुश्किल समय आता था, तो उनकी बहनें उन्हें समझाती थीं कि थोड़ा इंतजार करो, माता-पिता घर लौटेंगे, खाना मिलेगा और हालात बेहतर होंगे।
उन्होंने कहा कि उनकी बहनों ने उन्हें बिना किसी formal lesson के सिखाया कि जिंदगी में इंतजार करना भी जरूरी है और अगर लोग साथ हों, तो मुश्किल वक्त को सहना आसान हो जाता है।
इस Rakshabandhan पर संभाजी का कोई बड़ा celebration plan नहीं है। वह बस अपनी बहनों के साथ समय बिताना चाहते हैं, उनके साथ बैठना चाहते हैं और हर बहन को गले लगाकर एक ऐसा शब्द कहना चाहते हैं, जो उन्हें लगता है कि वह जिंदगीभर उनके लिए owe करते हैं-धन्यवाद।
संभाजी ने भावुक होकर कहा, “दुनिया के पास मुझे प्यार करने की कोई वजह नहीं थी, लेकिन मेरी बहनों ने मुझे तब भी प्यार करना चुना। मेरे पास आज जो कुछ भी है, उसकी शुरुआत उसी घर से हुई थी-उनके साथ।”